आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और वर्क कल्चर में कई लोग ऐसे होते हैं जो खुद को 'चेन स्मोकर' नहीं मानते, लेकिन दोस्तों के साथ किसी पार्टी में, वीकेंड पर या ऑफिस के कलीग्स के साथ कभी-कभार (महीने में दो-चार बार) सिगरेट का कश लगा लेते हैं। ऐसे लोगों को अक्सर 'सोशल स्मोकर' या 'ओकेजनल स्मोकर' कहा जाता है। आम तौर पर इन लोगों को लगता है कि वे रोज सिगरेट नहीं पीते, इसलिए उनकी सेहत को कोई बड़ा खतरा नहीं है और न ही इसका असर उनकी जेब पर पड़ेगा। लेकिन जब बात हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) यानी स्वास्थ्य बीमा खरीदने की आती है, तो यह 'कभी-कभार' वाली आदत आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि बीमा कंपनियों की नजर में सिगरेट पीना मतलब सिगरेट पीना होता है, चाहे आप दिन में एक डिब्बी फूंकते हों या महीने में सिर्फ एक बार सिगरेट पीते हों।
इंश्योरेंस में पूछी जाती है ये जानकारी
जब आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं, तो फॉर्म में एक कॉलम होता है जहां आपसे पूछा जाता है कि क्या आप तंबाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं। कई लोग इस डर से कि उनका प्रीमियम बढ़ जाएगा, या फिर यह सोचकर कि 'मैं तो कभी-कभार ही पीता हूं', इस बात को छुपा लेते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ऐसी कोई भी जानकारी छुपाना आपके लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां रिस्क असेसमेंट (जोखिम के मूल्यांकन) के आधार पर काम करती हैं। मेडिकल साइंस और इंश्योरेंस गाइडलाइंस के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को सांस, दिल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा एक नॉन-स्मोकर (धूम्रपान न करने वाले) की तुलना में कहीं अधिक होता है। यही वजह है कि कंपनियां स्मोकर्स से रिस्क कवर करने के लिए 20% से लेकर 50% तक ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं, और यह नियम सोशल स्मोकर्स पर भी समान रूप से लागू होता है।
अगर आपने छुपाया तो कंपनियों को कैसे पता चलेगा?
अब सवाल यह उठता है कि कंपनियों को कैसे पता चलेगा कि कोई व्यक्ति कभी-कभार सिगरेट पीता है? दरअसल, जब आप बड़ी राशि का हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं या आपकी उम्र थोड़ी ज्यादा होती है, तो कंपनियां पॉलिसी जारी करने से पहले प्री-पॉलिसी मेडिकल चेकअप करवाती हैं। इस चेकअप में 'कोटिनिन टेस्ट' (Cotinine Test) शामिल होता है, जो खून, थूक या यूरिन के जरिए शरीर में निकोटीन की मौजूदगी का पता लगाता है। अगर आपने कभी-कभार भी सिगरेट पी है, तो यह टेस्ट में आसानी से पकड़ा जा सकता है। इसके अलावा, मान लीजिए कि पॉलिसी लेते समय आपका टेस्ट नहीं हुआ और आपने यह बात छुपा ली, लेकिन भविष्य में जब आप किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होंगे और क्लेम करेंगे, तब डॉक्टर की केस हिस्ट्री या मेडिकल रिपोर्ट में यदि स्मोकिंग की बात सामने आ गई, तो कंपनी बिना देर किए आपका क्लेम रिजेक्ट (खारिज) कर सकती है।
इस पूरी स्थिति से बचने का सबसे सही और सुरक्षित तरीका यही है कि आप पूरी ईमानदारी बरतें। पॉलिसी खरीदते समय चाहे आप रोज सिगरेट पीते हों या कभी-कभार, फॉर्म में 'यस' (Yes) का विकल्प ही चुनें। भले ही शुरुआत में आपको थोड़ा ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़े, लेकिन कम से कम आपके मन में यह तसल्ली रहेगी कि इमरजेंसी के समय आपका क्लेम रिजेक्ट नहीं होगा। इसके साथ ही, अगर आप पिछले कुछ समय से स्मोकिंग पूरी तरह छोड़ चुके हैं (आमतौर पर कंपनियां 1 से 4 साल तक का स्मोकिंग-फ्री पीरियड देखती हैं), तो आप कंपनी को सूचित करके अपने प्रीमियम को कम करने की रिक्वेस्ट भी कर सकते हैं।
