मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। खाड़ी देशों, जो दशकों से दुनिया की तेल और गैस की जरूरतों को पूरा करने वाले मुख्य केंद्र रहे हैं, वहां के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (ऊर्जा बुनियादी ढांचे) को पहुंचे नुकसान ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे संकट के समय में अब दुनिया की नजरें अफ्रीका के दो प्रमुख देशों लीबिया और अल्जीरिया पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में बड़ी बाधा आती है, तो ये दो देश दुनिया के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं।
लीबिया के पास कितना तेल
लीबिया की बात करें तो यह देश अफ्रीका के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार (Proven Oil Reserves) का मालिक है। लीबिया के पास लगभग 48 बिलियन बैरल तेल का भंडार है। सबसे खास बात यह है कि लीबिया का कच्चा तेल 'लो-सल्फर' और 'स्वीट क्रूड' की श्रेणी में आता है, जिसे रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है। हालांकि, वहां की आंतरिक राजनीतिक स्थिति अक्सर चुनौती बनती रही है, लेकिन हाल के समय में तेल उत्पादन में स्थिरता लाने के प्रयास तेज हुए हैं। यदि लीबिया अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू करता है, तो वह वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
अल्जीरिया के पास कितना तेल
दूसरी ओर, अल्जीरिया न केवल तेल बल्कि प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का भी एक बहुत बड़ा खिलाड़ी है। यूरोप की गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही अल्जीरिया से पूरा होता है। अल्जीरिया के पास लगभग 159 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है, जो इसे दुनिया के शीर्ष गैस निर्यातकों की सूची में खड़ा करता है। इसके अलावा, वहां का तेल भंडार भी लगभग 12 बिलियन बैरल से अधिक है। खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति के कारण यदि समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो अल्जीरिया की पाइपलाइनों के जरिए यूरोप और अन्य देशों तक ईंधन पहुंचाना एक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
दुनिया की नजरें इनके ऊपर
हालांकि, यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। खाड़ी देशों की विशाल उत्पादन क्षमता की पूरी भरपाई करना लीबिया और अल्जीरिया के लिए रातों-रात संभव नहीं है। इसके लिए इन देशों में भारी निवेश और आधुनिक तकनीक की जरूरत है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में, ये देश दुनिया के लिए एक 'प्लान-बी' की तरह उभर रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं, अफ्रीका के इन देशों के साथ मजबूत संबंध बनाना आने वाले समय में महंगाई से बचने का एक बड़ा जरिया बन सकता है।
