फ्लैट बेचने के बाद क्या बिल्डर बदल सकता है प्रोजेक्ट का नक्शा? जानिए RERA का कानून और अपने अधिकार

प्रोजेक्ट में इमारतों या कॉमन एरिया के मंजूर किए गए प्लान, लेआउट प्लान या स्पेसिफिकेशन में बदलाव करने के लिए, प्रमोटर के अलावा कम दो-तिहाई बायर्स की लिखित मंजूरी जरूरी है।

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, यानी RERA के आने के बाद से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन अभी भी हालात पूरे तरह से ठीक नहीं हैं। बिल्डर द्वारा बायर्स के अधिकारों के हनन की खबरें आती रहती हैं। ऐसे में यह जनना जरूरी है कि रेरा होम बायर्स को क्या-क्या अधिकार देता है। अगर आपके मन में यह सवाल घूम रहा है कि क्या मैं जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करने जा रहा हूं, उस प्रोजेक्ट का नक्शा बिल्डर बाद में बदल सकता है? बता दें कि RERA की धारा 14 के तहत, एक बार जब खरीदार को मंजूर किए गए प्लान और स्पेसिफिकेशन दिखा दिए जाते हैं, तो प्रमोटर उनकी सहमति के बिना उस यूनिट के लिए उनमें कोई बदलाव नहीं कर सकता। इसके अपवाद सिर्फ वे छोटे-मोटे बदलाव हैं जिनके लिए खरीदार ने कहा हो, या कोई ऐसा छोटा सुधार जिसे आर्किटेक्ट या इंजीनियर ने स्ट्रक्चर के लिहाज से जरूरी बताया हो और जिसके लिए उचित नोटिस दिया गया हो।

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फ्लैट खरीदार के अधिकार

इन बदलावों के लिए मंजूरी लेना जरूरी

अगर किसी खास फ्लैट में दीवारें, फर्श या आने-जाने के रास्ते बदलने जैसा कोई बड़ा बदलाव करना हो, तो उस फ्लैट के मालिक (अलॉटी) की लिखित मंजूरी जरूरी है। बिल्डिंग या कॉमन एरिया में बदलाव करने के लिए, जैसे कि गार्डन को पार्किंग में बदलना, उस बिल्डिंग के कम से कम दो-तिहाई मालिकों की लिखित मंजूरी की जरूरत होती है। फाइनल सेल डीड पर साइन होने के बाद भी, अगर कब्जा मिलने के 5 साल के अंदर बिल्डिंग के स्ट्रक्चर या काम की क्वालिटी में कोई कमी पाई जाती है, तो प्रमोटर उसके लिए जिम्मेदार होता है और उसे 30 दिनों के अंदर मुफ्त में ठीक करना होता है।

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