Cabinet Decisions 4 November 2026 : केंद्र सरकार ने देश में एनर्जी स्टोरेज और क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए दो बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है। 4 नवंबर, 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ₹14,500 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding) यानी VGF योजना और ₹2,814 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना को हरी झंडी दी गई। दोनों योजनाओं के तहत कुल ₹17,314 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
कैबिनेट बैठक में बड़े फैसले
सरकार का मकसद केवल बिजली स्टोरेज क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि लिथियम और निकेल जैसे जरूरी खनिजों की घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना भी है। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
₹14,500 करोड़ से बनेगी 92 GWh की एनर्जी स्टोरेज क्षमता
सरकार ने देश में बिजली स्टोर करने की क्षमता बढ़ाने के लिए ₹14,500 करोड़ के वित्तीय आउटले वाली VGF योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 92 GWh की नई ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी।
इसमें तीन तरह की टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाएगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (Battery Energy Storage Systems) यानी BESS के जरिए 30 GWh, पम्प्ड स्टोरेज प्रॉजेक्ट्स (Pumped Storage Projects) यानी PSP के जरिए 60 GWh और उभरती हुई स्टोरेज टेक्नोलॉजी के जरिए 2 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
योजना का क्रियान्वयन वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगा। इसके तहत बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 40% डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (Domestic Content Requirement) भी लागू होगी। यानी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर बने कंपोनेंट्स के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।
इस योजना का बड़ा फायदा यह होगा कि सौर और पवन ऊर्जा से जब जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होगी, तब उसे स्टोर किया जा सकेगा। बिजली की मांग बढ़ने या रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन घटने पर इसी स्टोर की गई बिजली का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग के लिए ₹2,814 करोड़
दूसरी योजना के तहत सरकार ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ के कैपेक्स सपोर्ट स्कीम को मंजूरी दी है। इसके तहत लिथियम और निकेल की प्रोसेसिंग के लिए चार प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
इनमें 2 लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट होंगे, जिनमें प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन होगी। वहीं, 2 निकेल प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन होगी।
सरकार पात्र निवेश पर 30% तक कैपिटल सब्सिडी देगी। एक लिथियम लाभार्थी को अधिकतम ₹500 करोड़ और एक निकेल लाभार्थी को अधिकतम ₹900 करोड़ की सहायता मिल सकेगी। निकेल प्रोसेसिंग के दौरान कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिज को भी बाय-प्रोडक्ट के रूप में हासिल करने पर जोर रहेगा। इस योजना की अवधि भी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगी।
EV और बैटरी सेक्टर को क्या होगा फायदा?
लिथियम, निकेल और कोबाल्ट लिथियम-आयन बैटरी के प्रमुख कच्चे माल हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कारों, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में होता है।
फिलहाल महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग में भारत की घरेलू क्षमता सीमित है और आयात पर निर्भरता बनी हुई है। चीन का वैश्विक क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग में बड़ा दबदबा है। ऐसे में घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से सप्लाई चेन मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
दोनों योजनाओं को एक साथ देखें तो सरकार ने बिजली उत्पादन से आगे बढ़कर बिजली स्टोर करने और बैटरी के लिए जरूरी कच्चा माल देश में तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे भारत के EV, बैटरी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को लंबी अवधि में मजबूती मिल सकती है।
