अपना खुद का घर खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है। हालांकि, पहली बार घर खरीदने वाले (First-Time Home Buyers) अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी वजह से उन्हें लंबे समय तक ज्यादा EMI चुकानी पड़ती है। होम लोन (Home Loan) एक लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी होती है, इसलिए छोटी-सी चूक भी लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च करा सकती है। अगर आप भी जल्द घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ कॉमन मिस्टेक से बचने की सलाह दी जाती है-
घर खरीद रहे हैं तो आप न करें ये गलतियां (Photo: iStock)
जरूरत से ज्यादा लोन लेना
कई लोग बैंक से मिलने वाली अधिकतम लोन राशि को ही अपनी खरीद क्षमता मान लेते हैं। जबकि बैंक आपकी आय के आधार पर लोन मंजूर करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरी राशि ही उधार लेनी चाहिए। जानकारों की मानें तो EMI आपकी मासिक आय का ऐसा हिस्सा होनी चाहिए, जिसे चुकाने के बाद बाकी जरूरी खर्च और बचत भी आसानी से हो सके। जरूरत से ज्यादा लोन लेने पर हर महीने का वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
डाउन पेमेंट कम करना
कम डाउन पेमेंट करने से शुरुआत में पैसा जरूर बच जाता है, लेकिन इससे लोन की राशि बढ़ जाती है। नतीजतन पूरी अवधि में आपको ज्यादा ब्याज देना पड़ता है और EMI भी अधिक हो जाती है। अगर कर सकें तो अधिक डाउन पेमेंट करने की कोशिश करें। इससे न केवल लोन राशि कम होगी, बल्कि ब्याज का कुल बोझ भी घटेगा।
ब्याज दरों की तुलना नहीं करना
कई खरीदार बिना तुलना किए ही पहले बैंक का होम लोन ले लेते हैं। जबकि अलग-अलग बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अलग-अलग ब्याज दर और शर्तें ऑफर करती हैं। मात्र 0.25% या 0.50% की ब्याज दर का अंतर भी 20–30 साल के लोन में लाखों रुपये का फर्क पैदा कर सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अलग-अलग संस्थानों की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क की तुलना जरूर करें।
अतिरिक्त खर्चों को नजरअंदाज करना
घर खरीदते समय केवल प्रॉपर्टी की कीमत ही नहीं चुकानी होती। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग फीस, कानूनी शुल्क, इंटीरियर, मेंटेनेंस और शिफ्टिंग जैसे कई खर्च भी होते हैं।
अगर इन खर्चों का पहले से अनुमान नहीं लगाया जाए, तो बाद में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है और EMI संभालना मुश्किल हो सकता है।
लोन की अवधि सही तरीके से नहीं चुनना
कम EMI को देखकर कई लोग बहुत लंबी अवधि का होम लोन चुन लेते हैं। इससे मासिक किस्त तो कम हो जाती है, लेकिन पूरे लोन काल में ब्याज की कुल राशि काफी बढ़ जाती है। वहीं बहुत कम अवधि चुनने पर EMI इतनी ज्यादा हो सकती है कि मासिक बजट बिगड़ जाए। इसलिए ऐसी अवधि चुनें, जिसमें EMI भी आराम से चुकाई जा सके और कुल ब्याज भी कम देना पड़े।
