अपने सपनों का घर खरीदने के लिए कई लोग अंडर-कंस्ट्रक्शन (Under-Construction) प्रॉपर्टी का चुनाव करते हैं, क्योंकि यह रेडी-टू-मूव मकानों की तुलना में काफी सस्ती और बजट-फ्रेंडली होती है। हालांकि, निर्माणाधीन प्रॉपर्टी के लिए होम लोन लेना एक जटिल और जिम्मेदारी भरा कदम होता है। बैंक या बैंक से जुड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन का लोन एग्रीमेंट काफी लंबा और कानूनी पेचीदगियों से भरा होता है। ऐसे में कई बार खरीदार जल्दबाजी में बिना पढ़े या समझे दस्तावेजों पर साइन कर देते हैं, जिससे आगे चलकर पजेशन में देरी, पेनल्टी और भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए, होम लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले कुछ बुनियादी और बेहद जरूरी बातों को समझना आवश्यक है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए ले रहे हैं होम लोन?
ध्यान रखें ये चीजें
सबसे पहले, लोन के डिस्बर्समेंट स्ट्रक्चर (Disbursement Schedule) को ध्यान से चेक करें। अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में बैंक एक साथ पूरा पैसा बिल्डर को नहीं देता, बल्कि कंस्ट्रक्शन के अलग-अलग स्टेजेस के हिसाब से किस्तों (Construction-Linked Plan) में रकम जारी करता है। आपको एग्रीमेंट में यह देखना चाहिए कि डिस्बर्समेंट की शर्तें बिल्डर और बैंक दोनों के बीच स्पष्ट रूप से तय हों। इसके अलावा, 'प्री-ईएमआई' (Pre-EMI) और 'फुल ईएमआई' (Full EMI) के अंतर को समझें। पजेशन मिलने तक बैंक अक्सर केवल दिए गए लोन हिस्से पर ब्याज लेता है, जिसे प्री-ईएमआई कहते हैं। अगर आप पजेशन से पहले ही मूलधन (Principal Amount) भी चुकाना शुरू करना चाहते हैं, तो एग्रीमेंट में ट्रिस-पार्टी या फुल ईएमआई का विकल्प दर्ज होना चाहिए।
जांच लें ये चीजें
दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात प्रोजेक्ट के रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन और कानूनी मंजूरी (Approvals) की जांच करना है। बैंक भले ही लोन अप्रूव कर दे, लेकिन आपकी जिम्मेदारी है कि एग्रीमेंट में प्रोजेक्ट का RERA नंबर और संबंधित स्थानीय प्राधिकरण (Local Municipal Authority) से मिली मंजूरियों का जिक्र हो। इसके साथ ही, एग्रीमेंट में पजेशन की स्पष्ट तारीख और निर्माण में देरी होने पर मिलने वाले हर्जाने या मुआवजे की शर्त शामिल होनी चाहिए। अगर बिल्डर तय समय पर पजेशन देने में असमर्थ रहता है, तो लोन की ईएमआई का बोझ अचानक आपके बजट को प्रभावित कर सकता है, इसलिए 'क्लॉज ऑन डिले' (Clause on Delay) की समीक्षा जरूर करें।
लोन एग्रीमेंट से जुड़े हिडन चार्जेस और रीपेमेंट शर्तों पर विशेष ध्यान दें। एग्रीमेंट में प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्जेस, प्री-पेमेंट पेनल्टी और फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट में बदलने के चार्जेस का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमानुसार फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर कोई प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं लगती, इसे एग्रीमेंट में जरूर सुनिश्चित करें। इन सभी मुख्य बिंदुओं को समझकर और बैंक प्रतिनिधियों से स्पष्ट चर्चा करने के बाद ही एग्रीमेंट साइन करें, ताकि भविष्य में आपका होम लोन सफर परेशानी मुक्त और सुरक्षित रहे।
