होम बायर्स ध्यान दें! बिल्डर-बायर एग्रीमेंट में क्या-क्या पढ़ें? ये चेकलिस्ट आएगी काम

घर खरीदते समय सबसे बड़ा धोखा अक्सर कागज़ों में ही छिपा होता है। बिल्डर-बायर एग्रीमेंट में कुछ ऐसे शब्द लिखे होते हैं, जिन्हें अगर आपने सही से नहीं समझा, तो बड़ा नुकसान हो सकता है। खासकर कारपेट एरिया, सुपर बिल्ट-अप एरिया और लोडिंग फैक्टर ये तीन शब्द आपके सपनों के घर का पूरा हिसाब बदल देते हैं। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि क्या है बिल्डर-बायर एग्रीमेंट क्या है?

अगर आप घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। भारत में घर खरीदना हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा सपना होता है, और इसे पूरा करने के लिए लोग अपनी जीवनभर की कमाई तक निवेश कर देते हैं। लेकिन अक्सर जानकारी की कमी के कारण यही सपना कई बार निराशा और धोखे में बदल जाता है। घर खरीदते समय सबसे जरूरी दस्तावेज़ होता है बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, जिसमें कई ऐसी शर्तें होती हैं जिन्हें लोग या तो ठीक से पढ़ते नहीं या समझ नहीं पाते। बिल्डर भी अक्सर इसी एग्रीमेंट में ऐसे शब्द जोड़ देते हैं जिनका उपयोग बाद में खरीदार को भ्रमित करने के लिए किया जाता है। इसलिए किसी भी एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले उसके अंदर लिखे तीन शब्दों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिल्डर का सबसे बड़ा खेल इसी में छिपा होता है।

Builder Buyer Agreement

बिल्डर-बायर एग्रीमेंट

सबसे पहला शब्द है कारपेट एरिया। यह वह जगह होती है जिसका आप वास्तव में उपयोग करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो घर के अंदर जितनी जगह पर आप “कारपेट बिछा” सकते हैं, वही कारपेट एरिया कहलाती है। इसमें बेडरूम, हॉल, किचन और बाथरूम जैसी सभी उपयोगी जगह शामिल होती है। सरकारी नियम RERA के अनुसार, बिल्डर को फ्लैट की कीमत सिर्फ कारपेट एरिया के आधार पर ही तय करनी चाहिए। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपके एग्रीमेंट में कीमत और एरिया दोनों कारपेट एरिया के अनुसार ही लिखे हों। यदि बिल्डर इसके बजाय कोई और एरिया बताकर कीमत तय कर रहा है, तो समझ लें कि कुछ गलत हो रहा है।

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