बढ़ती महंगाई के दौर और मंदी के बीच मोदी सरकार का 2024 के आम चुनाव से पहले अंतिम पूर्ण बजट जारी होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद बजट सत्र की शुरुआत के साथ वित्त वर्ष 2023-24 के लिए आम बजट को पेश करेंगी। बीते कई सालों से सैलरी पर गुजारा करने वाले मध्यम वर्ग को टैक्स स्लैब में राहत नहीं मिली है और इस साल चुनाव से पहले ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार टैक्स स्लैब में लोगों के लिए कुछ छूट दे सकती है।
इनकम टैक्स स्लैब
बीते साल टैक्स भुगतान की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने बजट 2020 के दौरान अपनी नई आयकर व्यवस्था पेश की थी। साल 2020 का सिस्टम, जिसे 'सरलीकृत कर व्यवस्था' के रूप में जाना जाता है, उसमें आयकर गणना के दौरान कुछ कटौतियों और छूटों को छोड़ने के विकल्प के साथ कम टैक्स रेट की पेशकश की थी। यहां दोनों पुराने और नए टैक्स सिस्टम की स्लैब पर नजर डाल सकते हैं और जान सकते हैं कि कौन सी व्यवस्था आपके लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकती है।
1. पुराना टैक्स सिस्टम:
अगर पुरानी कर व्यवस्था को देखा जाए तो नई कर व्यवस्था की तुलना में टैक्स रेट ज्यादा है। लेकिन पुरानी व्यवस्था कई तरह की कटौती या टैक्स छूट देती है जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) टैक्स छूट, सेक्शन 80C, 80 D कटौती आदि।
टैक्स देने वाले व्यक्तियों के लिए कटौती की सबसे बड़ी धारा 80सी है, जिसकी मदद से एक बार में कर योग्य आय को 1.5 लाख रुपये तक कम किया जा सकता है।
2. 2020 तक का टैक्स सिस्टम:
नई आयकर व्यवस्था में कई बेहतर बिंदु हैं। जैसे यह कुल आय पर कर के बोझ को कम करने के लिए कम आयकर दरों की पेशकश करता है। यह वेतनभोगी करदाता की ओर से किए निवेश/व्यय के प्रमाण को बनाए रखने की जरूरत को भी खत्म करता है। इसके अलावा, टैक्स स्लैब से आयकर की भी गणना की जाती है। नया सिस्टम 15 लाख रेंज तक उप-रुपये में कम दरों की पेशकश करता है।
| इनकम लेवल (स्लैब) | पुराना टैक्स रेट रिजीम | नया टैक्स रेट रिजीम |
| 2,50,000 रुपये तक | 0% | 0% |
| 2,50,001 रुपये से 5,00,000 रुपये तक | 5% | 5% |
| 5,00,001 से 7,50,000 रुपये तक | 20% | 10% |
| 7,50,001 रुपये से 10,00,000 | 20% | 15% |
| 10,00,001 रुपये से 12,50,000 | 30% | 20% |
| 12,50,001 | 30% | 25% |
| 15,00,000 | 30% | 30% |
दोनों सिस्टम में एक बड़ा अंतर संशोधित स्लैब दरों का है। व्यक्तियों की ओर से भुगतान किया जाने वाला आयकर भारत में एक स्लैब प्रणाली पर आधारित है, जिसे व्यक्तियों की औसत आय के आधार पर बनाया गया है। इसलिए, 15 लाख रुपये तक आय वर्ग के लिए, नई कर व्यवस्था में कम आयकर दरों का प्रस्ताव किया है, लेकिन केवल तभी जब व्यक्ति आयकर अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध छूट और कटौती छोड़ने को तैयार हो।
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