22 लाख का प्लॉट 18.5 करोड़ में बिका! जानें इस भारी मुनाफे पर NRI को कितना देना होगा टैक्स

20 साल पहले 22 लाख में खरीदा गया प्लॉट अब 18.5 करोड़ में बिका है। इस भारी मुनाफे पर NRI विक्रेता को इंडेक्सेशन के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। साथ ही, एनआरआई होने के नाते कुल सेल वैल्यू पर टीडीएस (TDS) कटौती के नियम भी लागू होंगे।

रियल एस्टेट में निवेश अक्सर लंबी अवधि में जबरदस्त रिटर्न देता है, लेकिन कभी-कभी यह मुनाफ़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ साल 2004 में मात्र 22 लाख रुपये में खरीदा गया एक प्लॉट साल 2024 में 18.5 करोड़ रुपये में बिका। यह करीब 83 गुना से ज्यादा का उछाल है। हालांकि, इतना बड़ा मुनाफ़ा अपने साथ टैक्स की बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है, खासकर तब जब विक्रेता एक एनआरआई (NRI) हो।

NRI Tax

कैसे तय होता है टैक्स का गणित?

जब कोई भी व्यक्ति दो साल से अधिक समय तक प्रॉपर्टी अपने पास रखने के बाद उसे बेचता है, तो उस पर होने वाली कमाई 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' (LTCG) के दायरे में आती है। यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि 20 साल पहले के 22 लाख रुपये और आज के 22 लाख रुपये की वैल्यू में जमीन-आसमान का अंतर है। इसलिए, टैक्स की गणना करने के लिए 'इंडेक्सेशन' (Indexation) का सहारा लिया जाता है। इंडेक्सेशन की मदद से निवेश की लागत को महंगाई के अनुपात में बढ़ाया जाता है, जिससे टैक्स का बोझ थोड़ा कम हो जाता है।

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