Bitcoin निवेशकों के लिए 22 सितंबर 2026 का दिन काफी हलचल वाला रहा। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत करीब 87,000 डॉलर के ऊपर चली गई और 87,363 डॉलर का स्तर भी देखा गया। हालांकि, इसके बाद कीमत में कुछ गिरावट आई और यह करीब 85,500 डॉलर के आसपास कारोबार करती नजर आई। फिर भी Bitcoin पिछले हफ्ते के निचले स्तर से करीब 10,000 डॉलर ऊपर बना हुआ था।
8 महीने के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा रेट, आखिर ऐसा क्या हुआ?
क्यों आ रही है बिटकॉइन में तेजी?
Bitcoin में आई इस तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजहों में अमेरिकी Spot Bitcoin ETF में बढ़ता निवेश शामिल है। ETF के जरिए संस्थागत निवेशकों को सीधे Bitcoin खरीदे बिना इसमें निवेश का मौका मिलता है। हाल के दिनों में इन ETF में दोबारा पैसा आना शुरू हुआ है। 18 और 19 सितंबर के दौरान अमेरिकी Spot Bitcoin ETF में करीब 600 मिलियन डॉलर का नया निवेश आया था। इससे Bitcoin की मांग को सहारा मिला।
Bitcoin की तेजी में शॉर्ट पोजीशन की बड़ी भूमिका भी रही। कुछ ट्रेडर्स ने Bitcoin की कीमत गिरने की उम्मीद में Short Position ले रखी थी। लेकिन जब Bitcoin की कीमत तेजी से ऊपर जाने लगी तो इन ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन बंद करने के लिए Bitcoin खरीदना पड़ा। इससे बाजार में खरीदारी और बढ़ गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, क्रिप्टो बाजार में 1 अरब डॉलर से ज्यादा की Long और Short पोजीशन लिक्विडेट हुईं, जिसमें करीब 840 मिलियन डॉलर की Short Positions थीं। इससे तेजी को और गति मिली।
क्या है एक्सपर्ट्स का कहना?
Bitcoin की कीमत में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार का बेहतर माहौल भी एक कारण माना जा रहा है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है और अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी कुछ नीचे आई है। इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर दोबारा रुख कर सकते हैं, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है।
Bybit के इंडिया कंट्री मैनेजर विकास गुप्ता के मुताबिक, Bitcoin की हालिया तेजी में कई वजहों का असर दिख रहा है। Bitcoin करीब 86,000-87,000 डॉलर के स्तर तक पहुंचा है। इस तेजी को संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, स्पॉट Bitcoin ETF में बढ़ते निवेश और अमेरिका में क्रिप्टो से जुड़े नियमों में हो रहे बदलाव से सपोर्ट मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी और CLARITY Act को लेकर आई रुकावट के बावजूद Bitcoin ने मजबूती दिखाई है। इससे पता चलता है कि बाजार का रुख सिर्फ ब्याज दरों पर निर्भर नहीं है, बल्कि दूसरे आर्थिक और क्रिप्टो से जुड़े कारण भी निवेशकों के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।
इसके अलावा, शॉर्ट पोजीशन की बड़ी संख्या में क्लोजिंग और बाजार में जोखिम लेने की बढ़ती इच्छा ने भी Bitcoin की तेजी को सहारा दिया है। तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं भी कम हुई हैं।
विकास गुप्ता के अनुसार, अब सबसे अहम बात यह होगी कि Bitcoin 85,000 डॉलर के ऊपर अपना स्तर बनाए रख पाता है या नहीं। अगर यह स्तर कायम रहता है, तो मौजूदा रिकवरी में आगे और मजबूती आने की संभावना पर बाजार की नजर रहेगी। वहीं, हाल का करीब 87,400 डॉलर का हाई भी अब एक महत्वपूर्ण स्तर है, जिस पर निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर रहेगी।
8 महीने के हाई पर पहुंचा रेट
इसके अलावा Bitcoin ने हाल में एक अहम तकनीकी स्तर भी पार किया है। कीमत 82,000 से 83,000 डॉलर के आसपास के स्तर से ऊपर निकल गई। यह स्तर पिछले कुछ समय से Bitcoin के लिए एक महत्वपूर्ण रुकावट बना हुआ था। इसके ऊपर जाने के बाद बाजार में तेजी का भरोसा बढ़ा और मोमेंटम आधारित ट्रेडर्स की खरीदारी भी बढ़ी। Bitcoin अपने प्रमुख साप्ताहिक औसत स्तरों से भी ऊपर चला गया है।
क्रिप्टो बाजार में सिर्फ Bitcoin ही नहीं, बल्कि दूसरी बड़ी डिजिटल करेंसी में भी तेजी देखने को मिली। Ethereum, XRP, Solana और BNB जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी बढ़त रही। कुछ अन्य Altcoins में इससे भी ज्यादा तेजी देखी गई। इसका मतलब है कि Bitcoin की तेजी का असर पूरे क्रिप्टो बाजार के माहौल पर पड़ा है।
हालांकि, Bitcoin की इस तेजी को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि कीमत अब लगातार बढ़ती ही जाएगी। क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। 22 सितंबर को आठ महीने का हाई बनाने के बाद Bitcoin कुछ नीचे भी आया। इसके अलावा यह अभी भी अक्टूबर 2025 में बनाए गए करीब 1.26 लाख डॉलर के रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे है। इसलिए मौजूदा तेजी के बावजूद बाजार में जोखिम बना हुआ है।
भारत में भी Bitcoin और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले लोगों को इससे जुड़े जोखिम और टैक्स नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मुद्रा के तौर पर मान्यता नहीं देती। क्रिप्टो से होने वाली आय पर मौजूदा टैक्स नियम लागू होते हैं। इसलिए केवल कीमत में तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय जोखिम, उतार-चढ़ाव और टैक्स से जुड़े नियमों को समझना जरूरी है।
