Bitcoin Crash: क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में उथल-पुथल कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय डिजिटल करेंसी 'बिटकॉइन' (Bitcoin) अपने ऑल-टाइम हाई (All-Time High) से करीब 50 फीसदी तक क्रैश हो जाए, तो निवेशकों की धड़कनें बढ़ना लाजिमी है। क्रिप्टो बाजार में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों को गहरे असमंजस में डाल दिया है। हर तरफ बस एक ही सवाल गूंज रहा है क्या यह गिरते बाजार में सस्ते दाम पर बिटकॉइन खरीदने यानी 'बाय द डिप' (Buy the Dip) का सबसे सही मौका है, या फिर यह क्रिप्टो मार्केट के पूरी तरह डूबने का इशारा है और निवेशकों को इससे दूरी बना लेनी चाहिए?
क्यों आई बड़ी गिरावट?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्रिप्टो बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई? बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस भारी क्रैश के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि कई वैश्विक (Global) कारण जिम्मेदार हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों, विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई लगातार बढ़ोतरी ने बाजार से लिक्विडिटी (नगदी) को कम कर दिया है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक क्रिप्टोकरेंसी जैसे अत्यधिक जोखिम भरे एसेट्स से अपना पैसा निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं। इसके अलावा, दुनिया भर में क्रिप्टो रेगुलेशंस (सख्त नियमों) को लेकर बढ़ती कड़ाई और कई बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर तकनीकी या कानूनी संकट ने भी निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह डिगाया है, जिससे पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) का दौर शुरू हो गया।
क्या Buy the Dip सही?
ऐसी स्थिति में 'Buy the Dip' (गिरावट में खरीदना) की रणनीति कितनी सही है? क्रिप्टो के समर्थक और जोखिम लेने वाले निवेशक हमेशा इस बात की वकालत करते हैं कि जब बाजार लाल निशान में हो, तो खरीदारी का सबसे अच्छा समय होता है। उनका मानना है कि बिटकॉइन का इतिहास गवाह है कि वह हर बड़े क्रैश के बाद पहले से ज्यादा मजबूती के साथ उठ खड़ा हुआ है। अगर आप एक लॉन्ग-टर्म (लंबी अवधि) के निवेशक हैं और आपके पास कम से कम 3 से 5 साल का धैर्य है, तो इस 50% के डिस्काउंट को एक सुनहरे मौके के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे, यह रणनीति केवल उन लोगों के लिए है जो अत्यधिक उतार-चढ़ाव को बर्दाश्त करने की क्षमता रखते हैं।
या क्या क्रिप्टो से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए?
वित्तीय सलाहकारों का एक बड़ा वर्ग इस वक्त बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। पारंपरिक एसेट्स जैसे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी के पीछे कोई ठोस फिजिकल एसेट या सरकारी गारंटी नहीं होती है। इसकी कीमत पूरी तरह से बाजार की मांग, सप्लाई और सेंटीमेंट्स (भावनाओं) पर टिकी होती है। अगर बाजार और ज्यादा गिरता है, तो आपकी पूंजी बहुत कम समय में साफ भी हो सकती है। इसलिए, जिन निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है या जो अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं, उनके लिए इस समय क्रिप्टो मार्केट से दूर रहना और तमाशा देखना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होगा।
यदि आप फिर भी इस गिरते बाजार में पैर आजमाना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों की कुछ बुनियादी बातों को गांठ बांध लें। पहली और सबसे जरूरी सलाह यह है कि क्रिप्टो में केवल उतना ही पैसा लगाएं, जिसे अगर आप पूरी तरह खो भी दें, तो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, परिवार या भविष्य के जरूरी वित्तीय लक्ष्यों (जैसे घर, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट) पर कोई आंच न आए। लोन लेकर या इमरजेंसी फंड का पैसा कभी भी क्रिप्टो में न झोंकें। दूसरी बात, एक ही बार में सारा पैसा लगाने (Lumpsum) के बजाय 'सिप' (SIP) या टुकड़ों में खरीदारी की रणनीति अपनाएं, जिसे क्रिप्टो की भाषा में DCA (Dollar Cost Averaging) कहा जाता है। इससे आपका खरीद मूल्य औसत हो जाएगा और आप भारी नुकसान से बच सकेंगे।
