Gold-Silver Price today: त्योहारी सीजन में सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। आने वाले दिनों में दोनों कीमती धातु की कीमत में और गिरावट आ सकती है। आज MCX पर सोना 2,928 रुपये प्रति 10 ग्राम टूटकर 147,953 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 6,835 रुपये प्रति किलोग्राम टूटकर 227,800 रुपये पर आ गई है।
सोने-चांदी में गिराव
सेबी सर्टिफाइड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। मौजूदा स्तरों से सोना घरेलू बाजार में करीब ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम तक फिसल सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ सकती है। इसी तरह चांदी भी ₹2,28,000 से घटकर करीब ₹2,20,000 प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ सकती है।
गुप्ता के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल कीमती धातुओं के लिए दबाव बढ़ा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जबकि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव बाजार में अनिश्चितता को बढ़ा रहा है। इन सभी कारकों का असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है और दिवाली से पहले दोनों कीमती धातु में गिरावट आ सकती है।
क्यों सोने और चांदी में बढ़ी गिरावट?
एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में फिर बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोने की तेजी की रफ्तार धीमी पड़ रही है। ब्याज नहीं देने वाली संपत्ति होने के कारण सोने पर इन दोनों कारकों का दबाव बढ़ा है। जुलाई और अगस्त में करीब 11% की तेजी दर्ज करने के बाद सोने की कीमत इस महीने अब तक 6% गिर चुकी है और फिलहाल करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। सोने पर दबाव तब और बढ़ गया है, जब बाजार ने फेडरल रिजर्व की ओर से एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना है।
सिर्फ केंद्रीय बैंकों से मिल रहा सहारा
विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की खरीदारी से इसे सहारा मिल रही है। चीन का पीपुल्स बैंक ने अगस्त में 20.2 टन सोना खरीदा, जो 2023 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद है। पोलैंड भी इस साल सोने के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा। अगस्त में यूरोपीय फंड्स में भी गोल्ड ETF का शुद्ध अंतर्वाह दर्ज किया गया। केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी किसी भी बड़ी गिरावट को सीमित कर सकती है, क्योंकि वे कीमतों में कमी के दौर का उपयोग अपने भंडार को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
