Reliance Home Finance Insolvency: रिलायंस होम फाइनेंस, जो कभी अनिल अंबानी की कंपनी हुआ करती थी, के खिलाफ एक वित्तीय लेनदार, इनवेंट एसेट्स सिक्यूरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 की धारा 7 के तहत दिवालिया याचिका दायर की है। ये याचिका राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT), मुंबई पीठ के सामने दायर की गई है। याचिका में क्लेम अमाउंट 7.80 करोड़ रुपये (ब्याज समेत) है। रिलायंस होम फाइनेंस इस मामले में अपने हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह लेने और उचित कदम उठाने की योजना बना रही है।
रिलायंस होम फाइनेंस के खिलाफ याचिका दाखिल
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रिलायंस होम फाइनेंस ने किया बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट
रिलायंस होम फाइनेंस पर इस याचिका का वित्तीय प्रभाव क्या पड़ेगा, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है। ये कार्यवाही के अंतिम फैसले और उसके बाद की किसी भी कानूनी चुनौती पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि कंपनी ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) को अपना बिजनेस ट्रांसफर करने के लिए 29 मार्च, 2023 को एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट (BTA) किया था।
RCFL ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 100% सब्सिडियरी कंपनी है। कंपनी ने अपनी हाउसिंग फाइनेंस एक्टिविटी बंद कर दी है और अपना लाइसेंस/प्रमाणपत्र सरेंडर कर दिया है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक ने 25 जनवरी, 2024 मंजूरी कर दिया।
अनिल अंबानी की कई कंपनियों पर मुसीबत
अनिल अंबानी की कई कम्पनियाँ या तो पहले ही रेजोल्यूशन प्रोसेस से गुजर चुकी हैं या कॉरपोरेट दिवालिया रेजोल्यूशन प्रोसेस से गुजर रही हैं। इनमें सबसे बड़ी कम्पनियाँ हैं रिलायंस कैपिटल और रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड।
लिस्ट में रिलायंस कम्युनिकेशंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड भी शामिल हैं।
बिगड़ते गए अनिल अंबानी के हालात
सन 2000 के दशक के मध्य में, अनिल अंबानी एक बड़े कारोबारी साम्राज्य के टॉप पर खड़े थे। उन्हें अपने पिता धीरूभाई अंबानी के रिलायंस एम्पायर का एक हिस्सा विरासत में मिला था। लेकिन 2020 के दशक तक, यह साम्राज्य भारी कर्ज, कानूनी लड़ाइयों और बाजार में बदलाव के कारण ढहने लगा।
