Bank Lokpal : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की शिकायतों के समय पर और बेहतर समाधान को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत आरबीआई ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में आंतरिक लोकपाल (Internal Ombudsman) की नियुक्ति और उसके कामकाज को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मकसद वित्तीय संस्थानों के भीतर शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत बनाना है।
बैंकों और एनबीएफसी में ग्राहकों की शिकायतों के समाधान को मजबूत करेगा आरबीआई का नया कदम (तस्वीर-istock)
किन संस्थानों पर लागू होंगे नए नियम
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई द्वारा जारी ये दिशानिर्देश कई तरह की विनियमित संस्थाओं पर लागू होंगे। इनमें वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण जारीकर्ता और क्रेडिट सूचना कंपनियां शामिल हैं। आरबीआई ने सभी के लिए अलग-अलग लेकिन समान उद्देश्य वाले निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक का कहना है कि इन निर्देशों से संस्थाओं के भीतर ही ग्राहकों की शिकायतों का उच्च स्तर पर और तेजी से निपटारा हो सकेगा, जिससे ग्राहकों को बाहरी मंचों पर जाने की जरूरत कम पड़ेगी।
क्या है आंतरिक लोकपाल की भूमिका
आंतरिक लोकपाल एक स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी होगा, जिसका काम ग्राहकों की उन शिकायतों की समीक्षा करना होगा, जिनका समाधान संबंधित बैंक या एनबीएफसी पहले ही कर चुका है, लेकिन ग्राहक उससे संतुष्ट नहीं है। हालांकि, आरबीआई ने साफ किया है कि आंतरिक लोकपाल का कार्यालय सीधे ग्राहकों या आम जनता से शिकायतें स्वीकार नहीं करेगा। वह केवल उन्हीं मामलों को देखेगा, जिनकी जांच संस्था के स्तर पर हो चुकी है और जिनका निपटारा अंतिम रूप से किया जाना बाकी है।
आंतरिक लोकपाल बनने के लिए क्या होंगी योग्यताएं
आरबीआई के अनुसार, आंतरिक लोकपाल या तो सेवानिवृत्त या वर्तमान अधिकारी हो सकता है। उसका पद संबंधित विनियमित संस्था में महाप्रबंधक (General Manager) के समकक्ष होना चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवार के पास बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणाली, क्रेडिट सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में कम से कम सात साल का अनुभव होना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि लोकपाल अनुभवी हो और जटिल मामलों को समझने में सक्षम हो।
हर संस्था को करनी होगी आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति करनी होगी। यह कदम इसलिए जरूरी माना जा रहा है ताकि शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता आए और संस्थाओं के भीतर जवाबदेही तय हो सके। आरबीआई का मानना है कि आंतरिक लोकपाल के रूप में एक शीर्ष स्तर का स्वतंत्र अधिकारी होने से ग्राहकों की शिकायतों को निष्पक्ष तरीके से देखा जा सकेगा।
ग्राहकों को क्या होगा फायदा
इन नए दिशानिर्देशों से ग्राहकों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शिकायतों का समाधान अब संस्थाओं के भीतर ही उच्च स्तर पर हो सकेगा और ग्राहकों को बार-बार शिकायत दर्ज कराने या बाहरी मंचों का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और ग्राहकों का भरोसा बैंकों व एनबीएफसी पर और मजबूत होगा।
ग्राहक हितों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
आरबीआई ने कहा है कि ये दिशानिर्देश ग्राहकों के हितों की रक्षा और वित्तीय प्रणाली में विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं। आंतरिक लोकपाल व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका निष्पक्ष व समयबद्ध समाधान हो।
