Bangladesh Fuel Prices Hike : बांग्लादेश सरकार ने ईंधन की खुदरा कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की है। सोमवार को जारी किए गए नए आदेश के तहत पेट्रोल (Bangladesh petrol price hike) और मिट्टी के तेल (केरोसिन) के दाम (Bangladesh kerosene price hike) बढ़ा दिए गए हैं। यह पिछले छह सप्ताह के भीतर दूसरी बार है जब सरकार ने ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
बांग्लादेश में छह सप्ताह में दूसरी बार महंगा हुआ ईंधन (तस्वीर-istock)
पेट्रोल और केरोसिन के दाम बढ़े
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, केरोसिन की कीमत 130 टका प्रति लीटर से बढ़ाकर 135 टका प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं पेट्रोल की कीमत 135 टका प्रति लीटर से बढ़ाकर 140 टका प्रति लीटर कर दी गई है। यानी दोनों ईंधनों के दाम में 5-5 टका प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, आम लोगों को कुछ राहत देते हुए डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। डीजल पहले की तरह 115 टका प्रति लीटर की दर से ही उपलब्ध रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
बांग्लादेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन कीमतों में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में आई बढ़ोतरी के अनुरूप किया गया है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर आयात करने वाले देशों पर पड़ता है। बांग्लादेश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
सरकार ने बताया बढ़ोतरी का कारण
मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि नई कीमतें अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम उत्पादों की मौजूदा दरों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। सरकार का मानना है कि यदि समय-समय पर कीमतों में आवश्यक बदलाव नहीं किया गया, तो ईंधन पर मिलने वाली सब्सिडी का बोझ सरकारी खजाने पर और बढ़ सकता है। ऐसे में आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी हो जाता है।
स्वचालित मूल्य निर्धारण प्रणाली से तय होते हैं दाम
बांग्लादेश सरकार ने वर्ष 2024 में एक स्वचालित ईंधन मूल्य निर्धारण तंत्र लागू किया था। इस व्यवस्था के तहत घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव और ईंधन आयात की लागत को आधार बनाया जाता है। इन कारकों में होने वाले बदलाव के अनुसार समय-समय पर ईंधन की कीमतों में संशोधन किया जाता है।
आम लोगों पर पड़ सकता है असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेट्रोल और केरोसिन की कीमतों में वृद्धि का असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, डीजल की कीमत स्थिर रहने से माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र पर तत्काल बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। फिर भी लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
