महंगे इलाज के इस दौर में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की मांग तेजी से बढ़ी है। हर कोई अपनी जरूरत के अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रहा है। हाल ही में सरकार ने इंश्योरेंस पर जीएसटी की दर जीरो करने का ऐलान किया था। हालांकि, उसका बहुत फायदा पॉलिसी होल्डर को नहीं मिला। पॉलिसी की प्रीमियम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। साल दर साल बढ़ती पॉलिसी प्रीमियम के कारण बहुत सारे लोग अपनी पॉलिसी को सरेंडर कर दे रहे हैं या किसी दूसरी बीमा कंपनी में पोर्टेबिलिटी का विकल्प चुन रहे हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप बिना लाभ गवाएं किसी दूसरी कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में शिफ्ट होकर हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं।
हेल्थ पॉलिसी
पॉलिसी पोर्टेबिलिटी क्या होता है?
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी आपको एक इंश्योरर से दूसरे इंश्योरर के पास जाने की सुविधा देती है, और इस दौरान आपका पहले से पूरा किया हुआ वेटिंग पीरियड खत्म नहीं होता। मान लीजिए, अगर आपने पहले से मौजूद किसी बीमारी के लिए अपनी मौजूदा पॉलिसी में दो या तीन साल का वेटिंग पीरियड पूरा कर लिया है, तो उस क्रेडिट को नई पॉलिसी में आगे बढ़ाया जा सकता है। इस नियम को भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) का समर्थन प्राप्त है, जो पॉलिसीधारकों को कुछ लाभों को बरकरार रखते हुए अपनी पॉलिसी बदलने की अनुमति देता है।
हालांकि, यह केवल आपकी पुरानी पॉलिसी की बीमित राशि (sum insured) तक ही लागू होता है। अगर आप पोर्टिंग के दौरान अपना कवरेज बढ़ाते हैं, तो अतिरिक्त राशि पर एक नया वेटिंग पीरियड लागू हो सकता है।
पॉलिसी की पोर्टेबिलिटी में क्या साथ नहीं जाता?
अगर आप किसी नई कंपनी में अपनी पॉलिसी को पोर्ट करते हैं तो बोनस, ऐड-ऑन या पॉलिसी के कुछ खास फायदे का ट्रांसफर नहीं होता है। बता दें कि पोर्टेबिलिटी साल के किसी भी समय उपलब्ध नहीं होती। आपको अपनी मौजूदा पॉलिसी खत्म होने से पहले इसके लिए अप्लाई करना होता है। आम तौर पर कम से कम 45 दिन पहले। अगर आप यह समय सीमा चूक जाते हैं, तो हो सकता है कि आप पोर्टेबिलिटी का फायदा न उठा पाएं।
ये पेपर जरूर तैयार रखें
अगर आप किसी नई कंपनी में अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को ट्रांसफर करना चाहते हैं तो मौजूदा पॉलिसी की कॉपी, क्लेम हिस्ट्री और डिस्चार्ज समरी (अगर कोई हो) तैयार रखें।
