Cooperative Ministers Meeting : केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मंगलवार को सहकारिता व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित की गई। इसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारिता ढांचे को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना था। सरकारी बयान के अनुसार, इस बैठक में सहकारी समितियों के कामकाज को बेहतर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। खास तौर पर यह बात कही गई कि तकनीक के इस्तेमाल से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जा सकती है और कामकाज को आसान बनाया जा सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श (तस्वीर-X)
तकनीक और पारदर्शिता पर जोर
बैठक में मौजूद मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने से सहकारी समितियों को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता लाने पर भी जोर दिया गया, ताकि सदस्य किसानों का भरोसा और मजबूत हो। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी की जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और नई योजनाओं को लागू करने पर चर्चा की गई। बैठक को ‘मंथन बैठक’ नाम दिया गया, जिसमें राज्यों के अच्छे अनुभवों और सफल मॉडल्स को साझा किया गया।
गुजरात में 265 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक बैठक के दौरान अमित शाह ने गुजरात में 265.30 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का ई-डेडिकेशन और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं का मकसद सहकारिता क्षेत्र को नई ताकत देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। जिन प्रमुख परियोजनाओं की शुरुआत की गई, उनमें नर्मदा खंड उद्योग सहकारी मंडल का नया एथनॉल डिस्टिलरी प्लांट, 30 मेगावाट का बिजली उत्पादन संयंत्र और जैविक पोटाश संयंत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो नए भंडारगृह, अमूल का व्हे प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर प्लांट और एक कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) का भी शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं से किसानों और सहकारी संस्थाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कई बड़े नेताओं की मौजूदगी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री Bhupendra Patel भी मौजूद रहे। उनके साथ राज्य विधानसभा के अध्यक्ष Shankar Chaudhary, उपमुख्यमंत्री Harsh Sanghavi और केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री Krishan Pal Gurjar भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी नेताओं ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर बल दिया।
अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 पर विशेष रिपोर्ट
बैठक के दौरान अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र में विभिन्न राज्यों की अच्छी कार्यप्रणालियों पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट भी जारी की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर तैयार की गई रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। इसका उद्देश्य भारत में सहकारिता आंदोलन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।
प्रदर्शनी में दिखीं नई सेवाएं और उत्पाद
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें National Dairy Development Board, IFFCO, बनास डेयरी और अमूल समेत करीब 20 बड़े सहकारी संगठनों ने हिस्सा लिया। इन संस्थाओं ने अपनी नई सेवाओं, उत्पादों और तकनीकी नवाचारों को प्रदर्शित किया। इस पूरी बैठक का मकसद ‘सहयोग से खुशहाली’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना था। सरकार का मानना है कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाकर ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जा सकता है।
