ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, एनर्जी कंपनियों को अब देनी होगी ये अहम जानकारी

केंद्र सरकार ने कहा कि जनहित में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला की प्रभावी निगरानी के लिए इस प्रकार की सूचनाओं के व्यवस्थित संग्रह, संकलन और विश्लेषण को लेकर एक केंद्रीकृत संस्थागत प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है।

ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी जानकारी को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी सभी कंपनियों के लिए विस्तृत परिचालन जानकारी देना अनिवार्य हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026 के तहत सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की रिफाइनरी कंपनियों, LNG आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रोरसायन कंपनियों को पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को नियमित रूप से (कुछ मामलों में दैनिक आधार पर) विस्तृत जानकारी देनी होगी। मंत्रालय की 18 मार्च को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस आदेश में उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत के प्रतिरूप से संबंधित आंकड़े और जानकारी शामिल है। यह मौजूदा गोपनीयता प्रावधानों को निरस्त करता है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं में वृद्धि के बीच यह कदम उठाया गया है।

LPG Crisis

गैस संकट

88% कच्चे तेल का आयात करता है भारत

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है।

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