Global Oil Supply shock : अमेरिका और ईरान की जंग अब ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से पूरी दुनिया में ऑयल सप्लाई का ऐसा संकट आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल को लेकर हाहाकार मच सकता है। क्योंकि दुनियाभर में आपातकालीन ऑयल रिजर्व खत्म होने के कगार पर है। खासतौर पर अमेरिका का ऑयल बैंक पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।
ऑयल रिजर्व तेजी से खत्म हो रहे
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) की ताजा रिपोर्ट ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में खलबली मचा दी है। क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सुरक्षित तेल भंडार पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। अमेरिका का खुद का आपातकालीन भंडार पिछले 40 साल (1983 के बाद) में पहली बार खत्म होने की स्थिति में पहुंच चुका है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में न केवल क्रूड ऑयल के दाम पर होगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हाहाकार मचना तय माना जा रहा है।
क्यों खाली हो रहे रिजर्व?
जब भी दुनिया में कोई युद्ध या संकट आता है, तो देश अपने रणनीतिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) से तेल निकालकर बाजार को संतुलित करते हैं और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से रोकते हैं। इन्हें बाजार का 'शॉक एब्जॉर्बर' कहा जाता है। लेकिन इस बार सप्लाई संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज बंद होने की वजह से हर दिन दुनिया को 1.1 करोड़ बैरल क्रूड की आपूर्ति कम हो रही है। ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस को कंट्रोल करने के लिए विकसित देश (OECD) ने अपने रिजर्व फंड से मार्केट में सप्लाई शुरू की है। EIA के मुताबिक अगर सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो OECD का आपातकालीन रिजर्व दिसंबर तक 2.3 बिलियन बैरल से भी कम रह जाएगा, जो साल 2003 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
अमेरिका में गहराया संकट
अमेरिका भले ही लगातार यह दावा करता रहा है कि होर्मुज बंद होने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, अमेरिका ने अपनी विशाल भूमिगत गुफाओं में जो इमरजेंसी रिजर्व (SPR) बनाया था, वह अब पूरी तरह सिकुड़ चुका है। फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक SPR 1983 के बाद का सबसे निचले स्तर पर खाली होने की स्थिति में पहुंच गया है। अगर इस बीच कोई और बड़ी जियो-पॉलिटिकल दुर्घटना हो गई, तो सरकार के पास एनर्जी मार्केट को संभालने का अब कोई तरीका नहीं है, जिससे तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी। EIA के मुताबिक 5 जून तक अमेरिकी रिजर्व में केवल 349.2 मिलियन बैरल तेल बचा है। यह भंडार हर हफ्ते 9 मिलियन बैरल की रफ्तार से खाली हो रहा है। इसके अलावा इसमें बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसे पंप नहीं किया जा सकता है।
पेट्रोल-डीजल के लिए मचेगा हाहाकार
अमेरिका दुनिया में एनर्जी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। अमेरिकी रिजर्व खाली होने का असर ग्लोबल प्राइसिंग पर पड़ना तय है। क्योकि, जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की सप्लाई में कमी होगी, तो अमेरिका दुनियाभर से तेजी से आयात करेगा। अमेरिकी उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता दुनिया के ज्यादातर देशों से ज्यादा है। ऐसे में क्रूड के साथ ही ग्लोबल लेवल पर डीजल-पेट्रोल की सप्लाई भी असंतुलित हो सकती है और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है।
क्रूड के दाम उछले
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से झड़प होने की वजह से क्रूड ऑयल के दाम में बड़ा उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड जहां 95 डॉलर प्रति बैरल पार चला गया है। वहीं, WRI Crude 91 डॉलर से ऊपर ट्रेड कर रहा है।
