सभी बैंक अकाउंट होल्डर के लिए अपने अकाउंट में नॉमिनी का नाम दर्ज कराना बेहद जरूरी है। इससे यह साफ रहता है कि खाताधारक के न रहने पर पैसा किसे मिलेगा और रिश्तेदारों के बीच का आपसी विवाद भी कम होता है। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि अगर खाते में पहले से दर्ज नॉमिनी की ही मौत हो जाए, तो पैसा किसे मिलेगा? या नॉमिनी कितने दिन बाद पैसा निकाल सकता है? आइए जानते हैं नॉमिनी को लेकर बैंक के नियम?
कब निकाल सकते हैं पैसा?
अब बात करते हैं समय सीमा की, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के मुताबिक, अकाउंट होल्डर की मौत के बाद नॉमिनी द्वारा पैसे निकालने या क्लेम करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा (Time Limit) तय नहीं की गई है। इसका मतलब है कि नॉमिनी खाताधारक की मृत्यु के तुरंत बाद, कुछ महीनों बाद या फिर कुछ सालों बाद भी बैंक में जाकर पैसे के लिए दावा कर सकता है। बैंक कभी भी सिर्फ इस आधार पर क्लेम को खारिज नहीं कर सकता कि नॉमिनी बहुत देर से आया है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञ हमेशा यह सलाह देते हैं कि मृत्यु के बाद जितनी जल्दी हो सके (आमतौर पर कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर) क्लेम की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई तकनीकी या कानूनी पेचीदगी न आए।
अगर नॉमिनी पैसे न निकाले तो क्या होगा?
यदि नॉमिनी लंबे समय तक (जैसे 10 साल या उससे अधिक) बैंक से पैसा नहीं निकालता है, तो वह खाता 'इनऑपरेटिव' (Inoperative) या 'अनक्लेम्ड' (Unclaimed) कैटेगरी में चला जाता है। बैंक ऐसे खातों में जमा राशि को रिजर्व बैंक के 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस' (DEA) फंड में ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पैसा डूब गया। इसके बाद भी नॉमिनी जब चाहे आवश्यक दस्तावेज दिखाकर बैंक से अपना पैसा वापस पा सकता है, बस उस स्थिति में कागजी कार्रवाई थोड़ी लंबी और जटिल हो जाती है। इसलिए, देरी करने से बचने में ही समझदारी है।
क्या है RBI का नियम?
बैंक से पैसा निकालने या क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आरबीआई ने बैंकों को कड़े निर्देश दिए हैं। नियमों के अनुसार, यदि नॉमिनी सभी सही दस्तावेज जमा कर देता है, तो बैंक को 15 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करके पैसा नॉमिनी को सौंपना होता है। इस प्रक्रिया के लिए नॉमिनी को बैंक की उस शाखा (Branch) में जाना होगा जहाँ खाता था। वहां उन्हें एक क्लेम फॉर्म भरना होगा और उसके साथ कुछ जरूरी दस्तावेज लगाने होंगे, जैसे खाताधारक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Original Death Certificate), नॉमिनी का पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि), खाते की पासबुक या चेकबुक और गवाहों के हस्ताक्षर।
