Adani Group Share Price: पूंजी बाजार नियामक SEBI के गुरुवार के फैसले के बाद शुक्रवार,19 सितंबर को शुरुआती कारोबार में अडानी ग्रुप के शेयर आकर्षण का केंद्र बने हैं। SEBI ने गुरुवार को अपने अंतिम आदेश में गौतम अडानी और उनके ग्रुप को अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए शेयर हेरफेर के आरोपों से बरी कर दिया। SEBI ने कहा कि उसे इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि ग्रुप ने अपनी लिस्टेड कंपनियों में धन भेजने के लिए संबंधित पक्षों का इस्तेमाल किया।
अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी
आज सुबह अडानी ग्रुप के शेयर प्रभावशाली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। एनएसई पर अडानी पावर के शेयर 8.8% बढ़कर ₹686.95 प्रति शेयर पर पहुंच गए, जबकि अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 5.18% बढ़कर ₹2,526.60 प्रति शेयर पर पहुं गए। अडानी टोटल गैस 9.05% बढ़कर ₹661.85 पर कारोबार कर रहे थे। एनएसई पर अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर 3.64% बढ़कर ₹1,014.55 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे, जबकि अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के शेयर 2% बढ़कर ₹1,442.50 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। एनएसई पर एसीसी लिमिटेड के शेयर करीब 1% बढ़कर ₹1,873 प्रति शेयर पर थे, जबकि अंबुजा सीमेंट्स के शेयर 0.69% बढ़कर ₹584.75 प्रति शेयर पर थे।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने दो अलग-अलग विस्तृत आदेशों में कहा कि विस्तृत जांच के बाद इनसाइडर ट्रेडिंग, बाजार में हेरफेर और सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों के उल्लंघन के आरोप निराधार पाए गए।
गौर हो कि हिंडनबर्ग ने जनवरी 2023 में अडानी ग्रुप के खिलाफ जारी एक रिपोर्ट आरोप लगाया था कि आदिकॉर्प एंटरप्राइजेज प्राइवेट लि., माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लि. और रेहवर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लि. का इस्तेमाल अडानी ग्रुप की विभिन्न कंपनियों से सार्वजनिक रूप से लिस्टेड अडानी पावर लि. और अडानी एंटरप्राइजेज लि. को पैसा भेजने के लिए एक माध्यम के रूप में किया गया। सेबी बोर्ड के सदस्य कमलेश सी वार्ष्णेय ने दोनों आदेशों में कहा कि नियामक के खुलासा मानदंडों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ क्योंकि आदिकॉर्प, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच समूह की कंपनियों के साथ लेनदेन संबंधित पक्ष की परिभाषा दायरे में नहीं आता है।
इसमें प्रतिभूतियों के बड़े अधिग्रहण या नियंत्रण से संबंधित कोई उल्लंघन भी नहीं पाया गया जो निवेशकों को गुमराह कर सकता हो। सेबी जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अडानी की कंपनियों या अधिकारियों पर जिम्मेदारी थोपने या जुर्माना लगाने का कोई आधार नहीं था। सेबी का यह आदेश, जनवरी, 2023 की हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद महीनों की जांच और अटकलों के बाद आया है। रिपोर्ट के कारण सूचीबद्ध अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। हिंडनबर्ग कंपनी अब बंद हो चुकी है।
अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों का बार-बार खंडन किया और उसे पूरी तरह से आधारहीन बताया। सुपीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने भी कहा था कि अडानी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं है।
