Adani Energy New Project: अडानी एनर्जी सॉल्यूशन (Adani Energy Solution) एईएसएल ने महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 1,756 सर्किट किलोमीटर में फैले वरोरा कुरनूल ट्रांसमिशन (डब्ल्यूकेटीएल) को पूरी तरह से चालू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र के बीच बिना रुकावट 4500 मेगावाट बिजली ट्रांसमिट करने के लिए राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूती देगा। इससे दक्षिणी क्षेत्र ग्रिड भी मजबूत होगा और अक्षय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादन के बड़े पैमाने पर इंटीग्रेशन को सपोर्ट मिलेगा।
अडानी एनर्जी की नई परियोजना
वरोरा कुरनूल ट्रांसमिशन लिमिटेड
वरोरा कुरनूल ट्रांसमिशन लिमिटेड (डब्ल्यूकेटीएल) को दक्षिणी क्षेत्र (वरोरा-वारंगल और चिलकलुरिपेटा-हैदराबाद-कुरनूल) में बिजली आयात के लिए एक अतिरिक्त इंटर-रीजनल वैकल्पिक करंट लिंक तैयार करने के लिए अप्रैल 2015 में शुरू किया गया। इसे वारंगल में 765/400 केवी सब-स्टेशन की स्थापना के साथ शुरू किया गया था। डब्ल्यूकेटीएल किसी सिंगल योजना के तहत अब तक प्रदान की गई सबसे बड़ी 765 केवी डी/सी (हेक्सा कंडक्टर) टीबीसीबी (टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली वाली) परियोजना है। इसमें महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 1756 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइन बिछाना और वारंगल में 765 केवी सब-स्टेशन का निर्माण शामिल था, जिसे तैयार करने के अलावा उसका स्वामित्व, ऑपरेट और मैंटिनेंस शामिल है। 2016 की शुरुआत में इसे एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड को टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के आधार पर दिया गया। पर बाद में इसके कर्जदाताओं ने इसकी डेब्ट रिस्ट्रक्चरिंग की। फिर मार्च 2021 में इसे एईएसएल ने खरीद लिया।
टावरों में लगी 1,03,000 मीट्रिक टन स्टील
ये परियोजना कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टावरों को स्थापित करने में कुल 1,03,000 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया। इतनी स्टील से 10 एफिल टावर्स का निर्माण किया जा सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के लिए कुल 30,154 किमी कंडक्टर का उपयोग किया गया, जो चांद के तीन चक्कर लगाने के बराबर है। एक और चीज जो इसे महत्वपूर्ण बनाती है वह यह है कि आवश्यक कंडक्टर मैटेरियल विशेष मिश्र धातु (एलॉय) से बने हैं।यह इंजीनियरिंग का चमत्कार जैसा है। मजबूत नींव के साथ 102 मीटर ऊंचाई के दो मिड-स्ट्रीम टावर पहली बार कृष्णा नदी पर स्थापित किए गए। इसके लिए प्लानिंग और उसे लागू करना महत्वपूर्ण था, क्योंकि पूरे साल के दौरान सिर्फ तीन महीने ही तब काम किया जा सकता था, जब नदी में जल स्तर कम हो। अन्य चुनौतियों में टावरों का निर्माण और 116 प्रमुख बिजली लाइन, रेलवे की बिजली वाली पटरियां और राष्ट्रीय राजमार्गों को पार करने वाली लाइनों की स्ट्रिंग शामिल रही।
ये हैं बाकी उपलब्धियां
- 140 सीकेएम/माह की दर से 11 महीनों में 1,524 सीकेएम स्ट्रिंग पूरी की गई
- प्रतिदिन औसतन 15 गैंग और अधिकतम 40 गैंग के संग्रहण के साथ 100 एमटी टावर खड़ा किया गया
- साइटों पर 2,000 श्रमिकों की मौजूदगी
- इस परियोजना ने दो बड़े वैश्विक संकटों का भी सामना किया, जिनमें कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध शामिल हैं। इससे कमोडिटी सप्लाई चेन में अड़चन आई, जिससे बार-बार मोबिलाइजेशन और डीमोबिलाइजेशन जैसी चुनौतियां आईं
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड
एईएसएल, अडानी ग्रुप का हिस्सा, एक मल्टीडायमेंशनल कंपनी है जिसकी एनर्जी सेक्टर के विभिन्न सेगमेंटों में मौजूदगी है। इनमें पावर ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, स्मार्ट मीटरिंग और कूलिंग सॉल्यूशन शामिल हैं। एईएसएल देश की सबसे बड़ी प्राइवेट ट्रांसमिशन कंपनी है, जिसकी भारत के 14 राज्यों में मौजूदगी है। इसके पास 20,000 सीकेएम और 53,000 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी का ट्रांसमिशन नेटवर्क है। अपने डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में, एईएसएल महानगरीय मुंबई और मुंद्रा एसईजेड के औद्योगिक केंद्र में 1.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को सर्विस देती है। एईएसएल अपने स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस को बढ़ा रही है और भारत की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग इंटीग्रेटर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एईएसएल अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है और उपभोक्ता तक एनर्जी पहुंचाने के तरीके में बड़े बदलाव ला रही है। एईएसएल एनर्जी सेक्टर को सबसे विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ तरीके से बदलने के लिए एक प्रयास कर रही है।
