केंद्रीय बजट 2026‑27 में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और उपभोक्ताओं को कहीं न कहीं राहत और विकास के अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस बार बजट में सीधे तौर पर ऑटो उद्योग के लिए बड़े सब्सिडी ऐलान नहीं हुए, लेकिन इसमें कई ऐसे सुधार और प्रोत्साहन शामिल रहे, जो जल्द या देर से बाज़ार पर सकारात्मक असर डालेंगे।
ऑटो इंडस्ट्री को बड़ी राहत
सस्ती होगी ईवी
सबसे बड़ा फायदा इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) से जुड़ी गतिविधियों को मिलेगा। बजट में लिथियम‑आयन बैटरी निर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स) पर ड्यूटी छूट का प्रावधान रखा गया है। इससे भारत में बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक घटकों का स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा। समय के साथ, इस कदम से इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया वाहनों और बसों की कीमतों में कमी आएगी, बैटरी की उपलब्धता बेहतर होगी और भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।
ईंधन खर्च में राहत
सरकार ने बायोगैस‑मिश्रित सीएनजी के बायोगैस हिस्से पर पूरी एक्साइज ड्यूटी छूट देने की घोषणा की है। इसका मतलब यह है कि अब बायोगैस के लिए कोई एक्साइज टैक्स नहीं लगेगा। पहले केवल बायोगैस पर भरी गई GST को एडजस्ट किया जाता था, लेकिन इसके बावजूद थोड़ा बहुत टैक्स देनी पड़ती थी। अब यह पूरी तरह खत्म हो गया है। इस बदलाव के साथ CNG की खुदरा कीमतों में कुछ रुपए प्रति किलोग्राम तक कमी देखने को मिल सकती है।
ऑटो सेक्टर का उत्पादन
बजट में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का विस्तार भी शामिल है। यह घोषणा ऑटो सेक्टर के लिए मददगार साबित होगी। यह मिशन केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को भी शामिल किया जाएगा। इस मिशन के साथ ऑटो उद्योग की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत बनेगी। साथ ही, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में उत्पादन बढ़ेगा, निवेश बढ़ेगा और भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
ऑटो और ऑटो‑कंपोनेंट MSME
एक और महत्वपूर्ण कदम SME ग्रोथ फंड को 10,000 करोड़ का आवंटन है, जो ऑटो और ऑटो‑कंपोनेंट MSMEs को दीर्घकालिक पूंजी, उत्पादन क्षमता विस्तार, मशीनरी अपग्रेड और गुणवत्ता सुधार में मदद करेगा। छोटे और मध्यम आपूर्तिकर्ताओं के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
