Traffic Rules: सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए ट्रैफिक के नियमों का पालान बेहद जरूरी होता है। कार सेफ्टी को लेकर देश में मौजूद लोगों के विचार बदल रहे हैं और लोग बेहतर सेफ्टी फीचर्स वाली कारें खोजते हैं। लेकिन कार में चाइल्ड सेफ्टी को लेकर अभी भी बहुत से लोग जागरूक नहीं हैं। कार की पिछली सीट में आइसोफिक्स चाइल्ड सीट माउंट होते हैं लेकिन फिर भी लोग छोटे बच्चों को कार की अगली सीट पर लेकर यात्रा करते हैं। अब हाल ही में केरल के मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट ने कार की अगली सीट पर छोटे बच्चों को बैन कर दिया है। आइये आपको इस फैसले के पीछे मौजूद बड़ी वजह के बारे में बताते हैं।
कार की आगे वाली सीट पर छोटे बच्चे बैन, जानें क्या है वजह
फैसले की वजह
केरल सरकार ने यह फैसला हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद लिया है। दरअसल केरल में एक दंपति अपनी 2 साल की बेटी के साथ कार की अगली सीट पर बैठकर यात्रा कर रहे थे, तभी उनकी कार टकराई और सेफ्टी फीचर के तौर पर मौजूद एयरबैग खुल गए। लेकिन एयरबैग की वजह से बच्ची का दम घुट गया जिसकी वजह से उसकी मृत्यु हो गई। इस हादसे के बाद ही केरल मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट ने साख रुख अपनाते हुए कार की अगली सीट पर छोटे बच्चों को बैन कर दिया है।
क्या कहते हैं नियम
ज्यादातर लोगों को लगता है कि बच्चों को मां की गोद में कार की अगली सीट पर बैठना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट 2020 के सेक्शन 125A में स्पष्ट रूप से कार में यात्रा के दौरान CRS इस्तेमाल करना अनिवार्य है। CRS का अर्थ चाइल्ड रीस्ट्रेन सिस्टम होता है। 4 से 10 साल की उम्र वाले बच्चों, जिनकी हाइट 135 सेंटीमीटर से कम है, के साथ यात्रा करने पर सेफ्टी हार्नेस का इस्तेमाल भी आवश्यक है। 12 वर्ष की उम्र से अधिक का बच्चा जिसकी लंबाई 135 सेंटीमीटर से ज्यादा है, केवल वही बच्चा कार में आगे की सीट पर बैठ सकता है। अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपको 1000 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है और 3 महीनों के लिए आपका लाइसेंस भी सस्पेंड हो सकता है।
