केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए देश के सबसे ज्यादा दुर्घटना वाले 100 जिलों की पहचान की गई है। इन जिलों में दुर्घटना संभावित स्थानों पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को आधा करने का लक्ष्य भी रखा है।
2025 में 5.13 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं/photo-ai
सड़क सुरक्षा में लोगों का व्यवहार बड़ी चुनौती
PTI/भाषा के मुताबिक आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए सिर्फ सड़क और वाहनों में बदलाव करना पर्याप्त नहीं है। लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार दुर्घटनाओं में मौतों को शून्य तक लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
2025 में 5.13 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 5.3 प्रतिशत बढ़कर 5.13 लाख से अधिक हो गई। इन हादसों में 1,83,382 लोगों की मौत हुई। यानी औसतन हर घंटे करीब 21 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाई। इस दौरान देश में हर घंटे औसतन 59 सड़क हादसे हुए। गडकरी ने बताया कि 2026 की पहली छमाही में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने देशभर में 2,85,770 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की हैं।
दोपहिया वाहन हादसों में सबसे ज्यादा मौतें
गडकरी के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़े मामलों में हुईं। कुल सड़क हादसों में मौतों के मामले में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी 46.2 प्रतिशत रही। इसके बाद पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत और कार, टैक्सी, वैन तथा अन्य हल्के मोटर वाहनों में सफर करने वालों की हिस्सेदारी 12.4 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल सुनिश्चित करने से मौतों और गंभीर चोटों के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है।
सड़क हादसों से GDP को भी नुकसान
सड़क दुर्घटनाओं का असर सिर्फ लोगों की जान तक सीमित नहीं है। गडकरी ने बताया कि सड़क हादसों के कारण देश को GDP का करीब 3 प्रतिशत आर्थिक नुकसान होता है। इसे कम करने के लिए सरकार सड़क अभियांत्रिकी में सुधार, सुरक्षित वाहनों के निर्माण और यातायात नियमों के सख्त पालन पर जोर दे रही है।
22 लाख करोड़ रुपये का हुआ वाहन उद्योग
गडकरी ने देश के ऑटोमोबाइल उद्योग की बढ़ती ताकत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
