Maruti Suzuki Swift, Ignis, S-Presso Global NCAP Crash Test: मारुति सुजुकी की कारें सस्ती जरूर होती हैं और इसी वजह से भारतीय ग्राहकों द्वारा इन्हें खूब पसंद भी किया जाता है. लेकिन सेफ्टी के मामले में ये सस्ती कारें लंबे समय से फिसड्डी साबित हो रही हैं. हाल में ग्लोबल एनकैप ने मारुति सुजुकी एस-प्रेसो, इग्निस और ग्राहकों की पसंदीदा हैचबैक स्विफ्ट का क्रैश टेस्ट करके देखा है. इस क्रैश टेस्ट में इन तीनों कारों ने सुरक्षा के लिए सिर्फ 1 सितारा रेटिंग हासिल की है. इन तीनों कारों को लेटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों में निर्यात किया जाता है. बता दें कि इससे पहले भी क्रैश टेस्ट में एस-प्रेसो और स्विफ्ट का यही हाल हुआ था.
इससे पहले भी क्रैश टेस्ट में एस-प्रेसो और स्विफ्ट का यही हाल हुआ था.
क्या रहा क्रैश टेस्ट का परिणाम?
ग्लोबल एनकैप द्वारा किए गए क्रैश टेस्ट में इन तीनों कारों को अस्थिर पाया गया है, इसकी वजह कार के साथ स्टैंडर्ड या विकल्प में भी साइड एयरबैग्स और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसे फीचर्स का ना होना है. सामने से टक्कर की दशा में जहां स्विफ्ट को ठीक-ठाक सुरक्षा वाली कार कहा गया है, वहीं अगले पैसेंजर्स के पैर इस टक्कर में कम सुरक्षित पाए गए हैं. बगल से टक्कर मारने पर अगले यात्रियों का सिर और छाती असुरक्षित पाई गई है. बच्चों की बात करें तो 3 साल से बड़े बच्चों के लिए ठीक-ठाक और डेढ़ साल से छोटे बच्चों के लिए ये कार अपसेफ करार दी गई है.
एस-प्रेसो और इग्निस भी फिसड्डी
एस-प्रेसो की बात करें तो इस कार में ड्राइवर और को-पैसेंजर की छाती सामने से टक्कर की दशा में असुरक्षित पाई गई है. बाकी हिस्से ठीक-ठीक सेफ्टी पॉइंट पाते हैं. साइड एयरबैग्स नदारद होने से इसकी सेफ्टी रेटिंग में बड़ा फर्क आया है. 3 साल और डेढ़ साल दोनों उम्र के बच्चों के लिए ये कार उतनी सुरक्षित नहीं है. मारुति सुजुकी इग्निस का भी एस-प्रसो जैसा ही हाल है और ये कार बच्चों से लेकर वयस्कों की सुरक्षा के लिए सिर्फ 1 सितारा रेटिंग ही हासिल कर पाई है.
