भारत में बनी कारों का शानदार रहा सफर, वर्तमान दौर तक हुए कई बड़े बदलाव

देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर का इतिहास काफी रोचक रहा है। जहां 1945 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने संचालन की शुरुआत की वहीं, एक दौर ऐसा भी था जब बाजार में हिंदुस्तान एंबेसडर और प्रिमियर पदमिनी का दबदबा रहा।

भारत की सड़कों पर पहली कार 1897 में दौड़ी थी। समय के साथ देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर का इतिहास समृद्ध और रोमांच से भरा रहा है। इस इंडस्ट्री ने इन वर्षों में शानदार प्रगति का अनुभव किया है। बदलते समय के साथ गाड़ियों में हुए तेजी से बदलावों को हर दशक के साथ समझा जा सकता है।

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भारत में निर्मित कारों का बेहद रोचक रहा सफर (Photo : iStock)

1940-1950 का दौर

इस दौर में भारत में विदेशों से आयात गाड़ियों का इस्तेमाल होता था। इसके बाद हिंदुस्तान मोटर्स और प्रिमियर ने विदेशी मॉडलों पर आधारित कारों को बनाया। 1945 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने संचालन की शुरुआत की और जीप CJ सीरीज का निर्माण किया। इसी वर्ष जे.आर.डी. टाटा ने टाटा इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव कंपनी की स्थापना की।

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