भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के तहत अब ब्रिटेन से कुछ वाहनों का आयात करना आसान हो जाएगा। सरकार ने इस समझौते के तहत रियायती सीमा शुल्क (Custom Duty) का लाभ लेने की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है। यह नई व्यवस्था 15 जुलाई से लागू होने जा रही है। सरकार ने आयात के लिए कोटा तय किया है और केवल उन्हीं वाहनों को कम सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा, जो निर्धारित नियमों को पूरा करेंगे।
ब्रिटेन से वाहन आयात पर एफटीए के तहत शुल्क कोटा लाभ लेने की प्रक्रिया हुई अधिसूचित(AI Generated Image)
क्या है नया नियम?
न्यूज एजेंसी भाषा (पीटीआई) की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत भारत दोनों पक्षों के लिए निर्धारित कोटा के साथ मोटर वाहन आयात पर शुल्क को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करेगा। हालांकि, यह छूट सभी वाहनों पर नहीं मिलेगी। सरकार ने हर साल आयात होने वाले वाहनों की अधिकतम संख्या यानी कोटा (TRQ - Tariff Rate Quota) तय किया है।
सस्ती होंगी प्रीमियम कार
अगर कोई ब्रिटिश कंपनी इस योजना के तहत भारत में कारें लाती है, तो उन पर कम सीमा शुल्क लगेगा। इससे भविष्य में कुछ प्रीमियम कारों की कीमतों में कमी आ सकती है, जिनमें Land Rover Defender, Range Rover, Range Rover Sport, Range Rover Velar, Range Rover Evoque शामिल हो सकती हैं। हालांकि, यह फायदा केवल निर्धारित कोटा के भीतर आयात होने वाले वाहनों पर ही मिलेगा। साथ ही, सरकार ने यह भी कहा है कि आयातकों को रियायती शुल्क का लाभ अंतिम खरीदार यानी ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास करना होगा।
मुख्य बातें
- 15 जुलाई से नई आयात प्रक्रिया लागू होगी।
- ब्रिटेन से आने वाली कुछ कारों पर कम कस्टम ड्यूटी लगेगी।
- यह सुविधा केवल तय कोटा (TRQ) के भीतर आयात होने वाले वाहनों पर लागू होगी।
- केवल ब्रिटेन में बनी कारें ही इस योजना का लाभ ले सकेंगी।
- आयातक को ब्रिटेन द्वारा जारी Certificate of Origin प्रस्तुत करना होगा।
- केवल अधिकृत वाहन निर्माता (OEM) या उनके अधिकृत डीलर ही आवेदन कर सकेंगे।
- DGFT पूरे साल जारी होने वाले कोटा की निगरानी करेगा।
- कोटा पूरा होने के बाद रियायती शुल्क का लाभ नहीं मिलेगा।
पहले साल कितना रहेगा कोटा?
समझौते के पहले वर्ष में इन तीनों श्रेणियों में कुल 20,000 यात्री कारों के आयात की अनुमति होगी। इसमें अलग-अलग इंजन क्षमता के हिसाब से अलग कोटा तय किया गया है।
- 3,000cc से अधिक पेट्रोल और 2,500cc से अधिक डीजल इंजन वाली कारों के लिए 10,000 यूनिट का कोटा होगा। इन पर कस्टम ड्यूटी 110% से घटाकर 30% कर दी जाएगी।
- 1,500cc से 3,000cc तक की पेट्रोल और 2,500cc तक की डीजल कारों के लिए 5,000 यूनिट का कोटा होगा। इन पर शुल्क 66% से घटाकर 50% किया जाएगा।
- 1,500cc तक की मास-मार्केट कारों के लिए भी 5,000 यूनिट का कोटा तय किया गया है और इन पर भी शुल्क 50% रहेगा।
ब्रिटेन से भारत में आयात के लिए पारंपरिक इंजन वाले यात्री वाहनों का कोटा पांचवें वर्ष में विभिन्न श्रेणियों में बढ़कर 37,000 इकाई हो जाएगा। इसके साथ ही सीमा शुल्क क्रमिक रूप से घटकर अंतिम रूप से 10 प्रतिशत रह जाएगा। इसके बाद शुल्क में और कोई कटौती नहीं होगी।
इलेक्ट्रिक कारों को अभी नहीं मिलेगी बड़ी राहत
सरकार ने फिलहाल कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों के लिए अपना बाजार नहीं खोला है। 40,000 ब्रिटिश पाउंड (CIF) से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को इस समझौते के तहत कोई रियायत नहीं दी गई है। इसका उद्देश्य भारत की घरेलू कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी को संरक्षण देना है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली कारों पर पहले पांच वर्षों तक कोई शुल्क रियायत नहीं मिलेगी। हालांकि, छठे वर्ष से 40,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से 80,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) कीमत वाले ऐसे वाहनों पर सीमा शुल्क 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा और इनके लिए 400 इकाइयों का कोटा होगा। वहीं, 80,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से अधिक कीमत वाले ऐसे वाहनों पर शुल्क 40 प्रतिशत होगा और इनके आयात की सीमा 4,000 इकाई निर्धारित की गई है।
