नई कार खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन बढ़ती कीमतों के बीच अधिकांश लोग कार लोन के जरिए ही कार खरीदते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कार लोन कितने साल के लिए लेना चाहिए, 3 साल, 5 साल या 7 साल? सही अवधि चुनना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि EMI, ब्याज और कुल भुगतान की राशि सीधे-सीधे लोन टेन्योर पर निर्भर करते हैं। आइए जानते हैं कि कौन-सा विकल्प आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
how many tenure of car loan is best/Photo-CANVA
3 साल का कार लोन: हाई EMI, कम ब्याज बोझ
यदि आपकी मासिक आय अच्छी है और आप ऊंची EMI आसानी से चुका सकते हैं, तो 3 साल का लोन सबसे बेहतर माना जाता है।
फायदे: EMI ज्यादा होगी, लेकिन कुल ब्याज सबसे कम लगेगा। लोन जल्दी खत्म हो जाने से कार पर ब्याज का बोझ नहीं बढ़ता। क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत बनती है।
नुकसान: महीने की बचत कम हो जाएगी, क्योंकि EMI ऊंची होगी। कम आय या पहले से अन्य लोन होने की स्थिति में यह विकल्प थोड़ा भारी पड़ सकता है।
5 साल का कार लोन: EMI भी संतुलित, ब्याज भी ठीक-ठाक
भारत में अधिकांश लोग 5 साल का कार लोन चुनते हैं क्योंकि यह EMI और ब्याज नों का संतुलन बनाकर चलता है।
फायदे: EMI सामान्य रहती है, ज्यादातर लोगों के लिए आरामदायक। कुल ब्याज 7 साल वाले लोन से काफी कम। कार की वैल्यू गिरने से पहले लोन खत्म हो जाता है।
नुकसान: 3 साल वाले लोन की तुलना में ब्याज अधिक देना पड़ता है।
7 साल का कार लोन: कम EMI, लेकिन भारी ब्याज
लंबी अवधि वाला लोन EMI को काफी कम कर देता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जिनकी हर महीने की आय सीमित है।
फायदे: EMI सबसे कम, जिससे महीने का बोझ हल्का रहता है। नई कार खरीदना आसान हो जाता है।
नुकसान: कुल ब्याज सबसे ज्यादा देना पड़ता है। कार की वैल्यू काफी गिर जाती है, लेकिन EMI लंबे समय तक चलती रहती है। कुल भुगतान राशि अत्यधिक बढ़ जाती है।
कौन-सा लोन टेन्योर है सबसे फायदेमंद?
यदि आपकी आय स्थिर है और EMI संभाल सकते हैं, तो 3 साल का लोन सबसे किफायती और समझदारी भरा विकल्प है। मध्यम बजट वाले लोगों के लिए 5 साल का लोन बेहतर है क्योंकि EMI भी आरामदायक रहती है और ब्याज भी अधिक नहीं लगता। वहीं 7 साल का लोन केवल उन्हीं के लिए है जो कम EMI चाहते हैं, लेकिन कुल ब्याज के बढ़े बोझ को समझते हैं और स्वीकार करते हैं।
