ग्लोबल मार्केट में फसलों के दाम 30% तक बढ़े, लेकिन कीटनाशक और खाद की मांग सुस्त क्यों?

Crop Prices: वैश्विक बाजार में गेहूं और मक्के की कीमतें 30% तक बढ़ीं, लेकिन कमजोर मानसून और भीषण गर्मी के कारण कीटनाशकों (एग्रोकेमिकल्स) की वैश्विक मांग और भारतीय कंपनियों की आय घटी है।

Crop Prices : दुनियाभर के बाजारों में बीते महीनों के दौरान फसलों की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। गेहूं, सोयाबीन और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के दाम आसमान छू रहे हैं। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर एग्रोकेमिकल यानी फसल सुरक्षा रसायनों (कीटनाशक, कवकनाशी आदि) की मांग में कोई खास तेजी नहीं आई है। मशहूर ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म 'जैफरीज' (Jefferies) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सुस्त मानसून और विदेशी बाजारों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। इस विरोधाभास से यह स्पष्ट होता है कि फसलों की ऊंची कीमतों का फायदा फिलहाल कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों को नहीं मिल पा रहा है।

Agrochemicals, Crop Prices, Jefferies Report, Weak Demand, Wheat Prices

अनाज के दाम 30% बढ़े, फिर भी मंदी की मार झेल रही हैं एग्रोकेमिकल कंपनियां: जैफरीज रिपोर्ट

वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं से महंगी हुईं फसलें

जैफरीज की 'इंडिया केमिकल्स सितंबर तिमाही अर्निंग्स प्रिव्यू' रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में गेहूं के वैश्विक दामों में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की गई है। इसी तरह, सोयाबीन की कीमतों में 22 प्रतिशत और मक्का के दामों में 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। फसलों की कीमतों में आए इस उछाल का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं। काला सागर (ब्लैक सी) क्षेत्र में जारी गतिरोध और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष की वजह से दुनिया के कई देशों में अनाज की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फसलों के भाव तेजी से ऊपर चले गए।

End of Feed