उड़ीसा के बाद अब यहां किसानों के लिए परेशानी बना सस्ता टमाटर, खेतों में छोड़ दी तैयार फसल

टमाटर की बंपर पैदावार करने वाले झारखंड के कई किसानों ने फसलें खेतों में सड़ने के लिए छोड़ दी हैं। वजह यह है कि थोक बाजार में टमाटर मात्र दो-तीन रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। हालत यह है कि खुदरा बाजार में भी अधिकतम पांच से दस रुपए प्रतिकिलो से ज्यादा कीमत नहीं मिल पा रही है। फूलगोभी, पत्ता गोभी, पालक जैसी सब्जियों के भाव में भी लगातार गिरावट से किसान मायूस हैं।

Tomato Farming News: महीनों पसीना बहाकर टमाटर की बंपर पैदावार करने वाले झारखंड के कई किसानों ने फसलें खेतों में सड़ने के लिए छोड़ दी हैं। वजह यह है कि थोक बाजार में टमाटर मात्र दो-तीन रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कहीं-कहीं तो थोक खरीदारी करने वाले बिचौलिए एक रुपए प्रतिकिलो से ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किसानों की मेहनत और लागत का मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है। कई किसानों ने तो तैयार फसल ट्रैक्टर से रौंद डाली है। बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है। चतरा, लातेहार, हजारीबाग, जमशेदपुर, रामगढ़, बोकारो, रांची, लोहरदगा, गिरिडीह सहित कई जिलों में हजारों एकड़ इलाके में टमाटर की खेती हुई है, लेकिन जनवरी से ही बाजार में भाव में लगातार गिरावट आ रही है।

Tomato Farming

उड़ीसा के बाद अब यहां किसानों के लिए परेशानी बना सस्ता टमाटर

टमाटर उगाने से हो रहा नुकसान

हालत यह है कि खुदरा बाजार में भी अधिकतम पांच से दस रुपए प्रतिकिलो से ज्यादा कीमत नहीं मिल पा रही है। खेत से फसल तोड़कर बाजार तक लाने में मजदूरी और किराए पर जितना खर्च होता है, उतना पैसा भी नहीं मिल पा रहा। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा निवासी किसान सोनाराम मांझी बताते हैं कि एक कैरेट में 40 से 50 किलो टमाटर आता है, जिसे थोक खरीदार सिर्फ 30 से 35 रुपए में खरीद रहे हैं। चतरा के करनी निवासी किसान रघुनाथ महतो कहते हैं कि टमाटर की इतनी भी कीमत नहीं मिल रही, जितना खर्च इसके पौधे लगाने और सिंचाई में हुआ है। एक एकड़ में टमाटर उपजाने में 35 से 40 हजार रुपए तक का खर्च आता है और अभी टमाटर का जो भाव है, उसमें प्रति एकड़ फसल के हिसाब से आठ से दस हजार का नुकसान हो रहा है।

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