तुर्की और सीरिया में आए भूकंप ने कई लोगों को बेसहारा छोड़ दिया है। दोनों देशों में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने ऐसी तबाही मचाई कि अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों लोग घायल हैं। कई लोग मलबे में दबे हुए हैं और अभी भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। लेकिन तुर्की और सीरिया में जो हुआ, इससे पहले भी कई देशों में हो चुका है। आईए आज हम आपको कुछ ऐसे ही विनाशकारी जलजले के बारे में बताते हैं।
विश्व के टॉप-10 विशानकारी भूकंप
1. 22 मई 1960, चिली
भूकंप की तीव्रता- 9.5
ये दुनिया का अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 9.5 मापी गई। इस जलजले की वजह से सुनामी आ गई थी जिसने कई देशों में जबरदस्त तबाही मचाई। जापान, फिलीपींस से लेकर न्यूजीलैंड तक, कई देशों में इसका असर देखने को मिला था। हालांकि इसका सबसे ज्यादा असर चिली के वाल्डिविया शहर में हुआ। भूकंप का केंद्र यही था।
2. 27 मार्च 1964, अमेरिका
भूकंप की तीव्रता- 9.3
भूकंप के ये झटके अमेरिका के अलास्का में महसूस किए गए थे। अलास्का के आसपास के इलाके भी इसके जद में आए थे। भूकंप से ज्यादा तबाही सुनामी ने मचाई थी। उत्तरी अमेरिका में भूकंप के बाद आए सुनामी की वजह से भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसे उत्तरी अमेरिका में अब तक का सबसे घातक भूकंप माना जाता है। बताया जाता है कि उस दिन लगातार 4 मिनट तक अलास्का में धरती हिली थी।
3. 26 दिसंबर 2004, इंडोनेशिया
भूकंप की तीव्रता- 9.2
साल 2004 में भूकंप का केंद्र इंडोनेशिया का सुमात्रा था। इस आपदा ने लाखों जिंदगियों को लील लिया। जलजले के बाद आए सुनामी ने दक्षिण एशिया में जमकर तांडव मचाया। इसका असर थाईलैंड, श्रीलंका से लेकर भारत तक दिखाई दिया था। आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में ढाई लाख लोगों की मौत हुई थी। साथ ही हजारों लोग विस्थापित भी हुए थे।
4. 11 मार्च 2011, जापान
भूकंप की तीव्रता- 9
जापान के फुकुशिमा में आए जोरदार भूकंप में 18 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। बताया जाता है कि भूकंप के बाद आए सुनामी की वजह से 5 लाख से ज्यादा लोगों पर सीधा असर पड़ा था। लहरों में 3 लाख से ज्यादा इमारतें बह गई थी। कई लोग बेघर हो गए थे। जापान ने इससे पहले कभी इतने जोरदार झटके महसूस नहीं किए थे। हालांकि इससे पहले भी भूकंप के बाद उठे सुनामी ने जापान को अपना निशाना बनाया था।
5. 27 फरवरी 2010, चिली
भूकंप की तीव्रता- 8.8
चिली में साल 1960 के बाद 2010 में आए भूकंप ने भी जोरदार तबाही मचाई थी। इसमें भी कई मौतें हुई थी। चिली को भूकंप के लिहाज से काफी सेंसिटिव माना जाता है। कई स्टडी के बाद ये बताया गया कि चिली ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर बसा है। शोधकर्ताओं की मानें तो प्रशांत महासागर के किनारे बसे इस देश में पृथ्वी के सतह के नीचे काफी हलचल देखने को मिलती है। टेक्टोनिक प्लेट कई बार आपस में टकराते हैं।
6. 11 अप्रैल 2012, इंडोनेशिया
भूकंप की तीव्रता- 8.6
2004 में सुमात्रा में आए भूकंप के बाद इस भूकंप की तीव्रता 8.6 थी। हालांकि भूकंप का केंद्र जमीन के काफी नीचे होने की वजह से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इसमें भी कई लोगों के घर तबाह हो गए। इसके बाद साल 2022 में भी इंडोनेशिया में आए भूकंप ने कई लोगों की जान ले ली थी। हालांकि नवंबर 2022 में आए भूकंप की तीव्रता 5.6 ही मापी गई थी।
7. 25 अप्रैल 2015, नेपाल
भूकंप की तीव्रता- 8.1
2015 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आए भूकंप में 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। रूक-रूककर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी झटके महसूस किए गए। भारत में सबसे ज्यादा नुकसान बिहार और पश्चिम बंगाल में हुआ। नेपाल के सीमा से सटे होने की वजह से यहां जोरदार झटके महसूस किए गए थे।
8. 26 जनवरी 2001, भारत
भूकंप की तीव्रता- 7.7
गुजरात के भुज में आए भूकंप ने लाखों घरों को तबाह कर दिया था। इस जलजले में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। ये भारत में महसूस किए गए सबसे ज्यादा विनाशकारी भूकंप में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, इस विनाशकारी जलजले से कच्छ और भुज में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग घायल हुए थे और 4 लाख से ज्यादा मकान मलबे में तब्दील हो गए थे।
9. 8 अक्टूबर 2005, पाकिस्तान
भूकंप की तीव्रता- 7.6
अक्टूबर 2005 में पाकिस्तान के क्वेटा में आए भूकंप में 75 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। घायलों की संख्या भी 80 हजार के पार थी। आंकड़ें बताते हैं कि इस जलजले में 2 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए थे। पाकिस्तान में इससे पहले ऐसी भीषण आपदा नहीं आई थी। इसने वहां के लोगों को झकझोर कर रख दिया था।
10. 12 जनवरी 2010, हैती
भूकंप की तीव्रता- 7
हैती में आए इस भूकंप की तीव्रता 7 थी लेकिन इसमें 1 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। सबसे ज्यादा तबाही हैती की राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस में मची थी। आसपास के इलाके भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए थे। आज तक वहां रहने वाले लोग इस सदमे से उभर नहीं पाए हैं। बताया जाता है कि इस भूकंप के बाद 50 से ज्यादा ऑफ्टर शॉक्स महसूस किए गए थे।
