...तो इसलिए ट्रंप को नहीं मिला शांति का नोबेल पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति के ये फैसले बने रुकावट!

अपने दूसरे कार्यकाल का पद संभालने के बाद ट्रंप ने ऐसे कई फैसले किए जो नोबेल पुरस्कार पाने की राह में बाधा बने। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने के लिए उन्होंने एग्जीक्यूटिव आदेशों पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टैक्स समझौते को नहीं माना।

Nobel Peace Prize 2025: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को हो गई और यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वेनेजुएला की 'आयरन लेडी' कोरिना मचाडो को दिया गया। मचाडो लोकतंत्र समर्थक और निरंकुश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने वाली एक्टिविस्ट हैं। यह सम्मान देते हुए नॉर्वे की नोबेल समिति ने कहा कि 'यह सम्मान उन्हें वेनेज़ुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके 'अथक संघर्ष' और देश को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर ले जाने के प्रयासों के लिए दिया गया है। नोबेल समिति की इस घोषणा से सबसे बड़ा झटका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगा है। ट्रंप को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें यह पुरस्कार मिलेगा लेकिन नाम का ऐलान होते ही उनका सपना टूट गया।

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ट्रंप को नहीं मिला शांति का नोबेल पुरस्कार। तस्वीर-AP

अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से इस पुरस्कार पर अपना दावा करते आ रहे थे। ट्रंप ने कई मौकों पर कहा कि उन्होंने दुनिया भर में सात से आठ युद्ध रुकवाए। उन्होंने तो यहां तक कहा कि यदि यह पुरस्कार बराक ओबामा को मिल सकता है तो उन्हें क्यों नहीं। बहरहाल, नोबेल शांति पुरस्कार पाने की ट्रंप की हसरत इस बार पूरी नहीं हो पाई है। भविष्य में क्या होता है, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन एक्सपर्ट्स पहले से यह मानकर चल रहे थे कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की संभावना बहुत क्षीण है क्योंकि नोबिल समिति जिन मानकों पर यह पुरस्कार देती है, उस पर ट्रंप पूरी तरह से खरे नहीं उतरते हैं।

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