S Jaishankar: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया दी है। वाशिंगटन में एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि 'जटिल बुनियादी वास्तविकताओं' की वजह से इस डील के होने में उम्मीद से ज्यादा वक्त लग रहा है। हालांकि, जयशंकर ने कहा कि इस ट्रेड डील पर दोनों देशों की राय कमोबेश एक जैसी है। विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए हुए हैं। उन्होंने 26 सितंबर को यूएनजीए के सत्र को संबोधित किया। जयशंकर ने आतंकवाद पर अमेरिकी रुख के बारे में भी टिप्पणी की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर।
यह हमारे लिए कोई सांत्वना नहीं हो सकती-जयशंकर
कार्यक्रम में जयशंकर नेकहा, 'मुझे लगता है कि अगर मैं भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक रूप से देखूं, तो मैं यह कह सकता हूं कि दुनिया के कई अन्य देशों के अमेरिका के साथ संबंध अधिक कठिन रहे हैं। मेरा मतलब है कि यह हमारे लिए कोई सांत्वना नहीं हो सकती, लेकिन यह एक वास्तविकता है। जयशंकर भारत-अमेरिका संबंधों, खासकर पिछले एक साल में व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रमों एवं द्विपक्षीय रिश्तों को 'बेहतर दिशा' में ले जाने के लिए जरूरी कदमों से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे।
'समाज की संरचना भी एक-दूसरे से बहुत अलग है'
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों के सामने मौजूद चुनौतियों में से एक व्यापार वार्ता भी है, जिसमें 'दांव' और 'जटिलताएं' शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'यह ध्यान में रखना चाहिए कि भारत छोटे उत्पादकों का देश है-छोटे कृषि उत्पादक और छोटी फैक्ट्रियां। भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय के अंतर के अलावा, उत्पादन की प्रकृति और समाज की संरचना भी एक-दूसरे से बहुत अलग है।'
'आतंकवाद पर US ने नहीं दिखाई पर्याप्त संवेदनशीलता'
एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका की ओर से भारत की सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता न दिखाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसका असर भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए जो चीज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, वह आतंकवाद का मुद्दा है। दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं, जिन्हें उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा भारत ने एक पड़ोसी देश की ओर से कई दशकों से जानबूझकर और सुनियोजित नीति के तहत झेला है। यह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। लेकिन इसको लेकर पर्याप्त समझ, सराहना या संवेदनशीलता नहीं है। मेरा मानना है कि इससे भी एक समस्या पैदा होती है।'
हमें वास्तविकताओं को ध्यान में रखना होगा-जयशंकर
उन्होंने आगे कहा, 'आज लोगों की आवाजाही की अर्थव्यवस्था और लोगों की आवाजाही की राजनीति एक-दूसरे के विपरीत दिशा में जा रही हैं। निश्चित रूप से, आम धारणा के स्तर पर यह एक मुद्दा है। आज हमारी कूटनीति सिर्फ देशों, नेताओं, मंत्रियों या यहां तक कि राजनयिकों के स्तर पर ही नहीं चलती। सोशल मीडिया के दौर में जनमत की भूमिका बहुत बड़ी हो गई है, जो खासकर लोकतांत्रिक समाजों में अपना प्रभाव दिखाता है। मेरा मानना है कि हमें इस वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा।'
'हम जितना आगे बढ़ेंगे, संबंध उतने बेहतर होंगे'
जयशंकर ने कहा, 'हम निश्चित रूप से उम्मीद करते हैं और चाहते हैं कि भारत-अमेरिका संबंध आगे बढ़ें और बेहतर दिशा में जाएं। लेकिन हमें जिन मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, उनके बारे में मुझे वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखना होगा। और जिस हद तक हम इनमें से कुछ मुद्दों पर आगे बढ़ने में सक्षम होंगे, हमारे संबंध उतने ही बेहतर होंगे। आइए, इसे इस नजरिए से देखें।'
