सचिन की पाकिस्तानी दुल्हनिया सीमा हैदर पर पाकिस्तान में कोहराम मचा है..वहां के कट्टरपंथियों को सीमा का हिंदू बनना पसंद नहीं आ रहा..सीमा की घर वापसी का दबाव बनाने के लिए पाकिस्तान में मंदिरों पर हमले हो रहे हैं...पाकिस्तानी कट्टरपंथियों को डर सताने लगा है कि कहीं पाकिस्तानी लड़कियां भारत आकर हिंदू न बनने लग जाएं..लेकिन इसी पाकिस्तान में अब लड़कियां शाकाहारी बनना चाह रहीं.. उनमें डोसा से लेकर वड़ापाव जैसे इंडियन फूड का क्रेज भी देखने को मिल रहा है..जबकि वहां के मुस्लिम यूथ में NO टू नॉनवेज ट्रेडिंग है.. पाकिस्तानी महिलाओं में तो इंडियन Momos की दीवानगी खासकर देखी जा रही है.. आखिर पाकिस्तान में इंडियन फूड की इतनी हाई डिमांड क्यों है..देखिए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में..
पाकिस्तान में अब लड़कियां शाकाहारी बनना चाह रहीं हैं
पाकिस्तान में वक्त बदल रहा है..जज्बात बदल रहे हैं..हालात बदल रहे हैं..वो मुल्क जिसका आहार ही मुर्ग और गोश्त की पहचान है वहां लोगों का ज़ायका भी बदल रहा है...जायका इंडिया का..वो भी वैजेटेरियन..पाकिस्तान में जबरदस्त हिट हो रहा है..ठीक वैसे ही जैसे कि भारतीय फिल्में, बॉलीवुड गीत या फिर हीरो और हीरोइंस..
'मैं कभी इंडिया गई ना तो मैं वहां का स्ट्रीट फूड बहुत शौक से ट्राई करूंगी'
PAK में इंडियन फूड का क्रेज को लेकर एक पाकिस्तानी लड़की का कहना है कि- वहां का खाना बहुत मजे का है..मैं कभी इंडिया गई ना तो मैं वहां का स्ट्रीट फूड बहुत शौक से ट्राई करूंगी..वहां का वडा पाव वहां की ललचा देने वाली डिशेज होती है ना बहुत ज्यादा मुंह में पानी आता है..
वहां के मोमोज मुझे बहुत ज्यादा अट्रैक्ट करते हैं.
'वहां जाकर फुटबॉल बन जाऊंगा'
वहीं एक पाकिस्तानी शख्स का कहना है कि-देखिए सबसे पहली बात इंडियन फूड का बड़ा शौकीन हूं..ठीक है, चीज और बटर का तो इस तरह इस्तेमाल करते हैं पता नहीं उनके पास पहाड़ है..ठीक है..उनके हर खाने में जनाब चीज होती है..यकीन करें मेरे मुंह से ऐसे पानी आ रहा होता है..हमारे पाकिस्तान में तो चीज का नामोनिशान ही नहीं है..दूर-दूर तक जाकर इंपोर्टेड खरीदना है तो खरीद लो..बटर यहां पर इतना ज्याद अच्छा नहीं है..यहां पर पनीर बिल्कुल भी नहीं है..तो फूड के हिसाब से देखा जाए ना तो यकीन करें मुझे वीजा ले दें इंडिया का..मैं जाऊं वहां जाकर फुटबॉल बन जाऊंगा..अभी तो मेरी कुछ सेहत नहीं है..मुझे बहुत पसंद है इंडियन फूड..
कोस-कोस पर पानी बदले चार कोस पर वाणी
हिंदुस्तान के बारे में एक बात बड़ी मशहूर है..कोस-कोस पर पानी बदले चार कोस पर वाणी..मतलब यहां जबरदस्त विविधता है..और यही विविधता हिंदुस्तानी कुजिन को सबसे समृद्ध बनाता है..उत्तर का खाना अलग होता है..तो दक्षिण भारतीय व्यंजन अलग--राजस्थान का टेस्ट अलग--जबकि बिहार का अलग--और जब से फास्ट फूड का कल्चर आया है तब से शाकाहारी व्यंजनों की वैरायटी बढ़ गई है..जिसको लेकर दीवानगी पाकिस्तान में भी देखी जा सकती है..खासतौर से महिलाओं में जिन्हें भारतीय शाकाहारी व्यंजन अपनी तरफ खींच रहे हैं..
एक पाकिस्तानी लड़की बोली- मैं दाल को चावल के साथ ट्राई करूंगी..साथ में ये चटनी
मुझे नहीं समझ आ रहा कि पहले क्या ट्राई करूं लेकिन मैं ऐसे लाइन से जाऊंगी..सबसे पहले हमारे पास है दाल..और मैं दाल को चावल के साथ ट्राई करूंगी..साथ में ये चटनी है..ये थोड़ी सी मैं लूंगी और उसके साथ खीरा मुझे बहुत ही पसंद है दाल चावल के साथ..ये ले लिया..ये लिटरली ब्लास्ट है..मैं बिल्कुल भी बढ़ा-चढ़ा कर नहीं बता रही..मैं फूड के मामले में बहुत ज्याद ईमानदार हूं पहले बताया..ये बिल्कुल ब्लास्ट है आपके मुंह में..इतना मजे का है..क्योंकि अलग-अलग चीजें मिक्स हैं.
हिंदुस्तान में मौसम के हिसाब से खानपान की रवायत रही है
हिंदुस्तान में मौसम के हिसाब से खानपान की रवायत रही है..मसलन सावन का महीना ही ले लीजिए इसमें ज्यादातर लोग शाकाहार पर शिफ्ट हो जाते हैं..इसके धार्मिक कारण तो हैं ही..साइंटिफिक कारण भी हैं..हिन्दुस्तानियों के खानपान की यही टेंडेंसी अब पाकिस्तान में भी देखी जा रही है..पाकिस्तान में भी सावन के महीने में वेजेटेरियंस की तादाद बढ़ती जा रही है..
पाकिस्तानी नॉन वेज छोड़कर शाकाहारी खाना या वीगन डाइट अपना रहे हैं
पाकिस्तान में अगर कोई खुद को वेजिटेरियन बताता है..तो वहां के लोगों का रिएक्शन कुछ ऐसा होता था..वो चौंक जाते थे..लेकिन अब पाकिस्तान की तस्वीर बदल रही है..पाकिस्तानी नॉन वेज छोड़कर शाकाहारी खाना या वीगन डाइट अपना रहे हैं..लेकिन पाकिस्तान जैसे देश जहां नॉनवेज खाना बहुत आम है..वहां वीगन डाइट अपनाने में क्या दिक्कते हैं..उसे भी पाकिस्तानी वीडियो के जरिए दिखा रहे हैं..
पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी और कंगाली भी कही ना कहीं जिम्मेदार
फूड हैबिट में बदलाव को लेकर पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी और कंगाली भी कही ना कहीं जिम्मेदार है..दालें सब्जियां और शाकाहारी खाने की कीमत मांसाहार की अपेक्षा कम ही होती है..इसके अलावा पाकिस्तान में कई बार ऐसी खबरे सामने आ चुकी हैं जब वहां मटन के नाम पर गधा काटकर खिला दिया जाता है..ऐसे हालत में शाकाहारी आहार अगर लोगों को लुभा रहा है तो इसमें कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए..
