ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने देश के परमाणु कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने के अमेरिकी प्रयासों की वैधता को चुनौती दी है। साथ ही उन्होंने इस तरह के हस्तक्षेप के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है। पेज़ेश्कियन ने कहा कि वाशिंगटन के पास देश को उसके तकनीकी अधिकारों से वंचित करने के प्रयास का कोई वैध अधिकार नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन
पेज़ेश्कियन ने ट्रंप प्रशासन के कठोर रुख पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे कहते हैं कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि किस अपराध के लिए। किसी राष्ट्र को उसके अधिकारों से वंचित करने का अधिकार उन्हें किसने दिया?
झुकने को तैयार नहीं ईरान
गौरतलब है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों के दायरे और निगरानी को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहने के कारण राजनयिक गतिरोध जारी है। उनके ये बयान दिखाते हें कि तेहरान बाहरी दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है और वह अपने परमाणु विकास को एक संप्रभु अधिकार के तौर पर देखता है। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस कार्यक्रम की निगरानी और सीमित दायरे की मांग करते रहे हैं।
बयानबाजी के बाद भी वार्ता जारी
हालांकि, दोनों तरफ से तीखी बयानबाजी के बावजूद कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह ठप नहीं हुए हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और कुछ मुद्दों पर सीमित प्रगति के संकेत भी मिले हैं, लेकिन अभी भी कई बड़े मतभेद बने हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने भी माना है कि हालिया बातचीत से कुछ दूरी कम हुई है, मगर निर्णायक समाधान अभी दूर है।
इसके साथ ही इस पूरे विवाद का एक और बड़ा रणनीतिक पहलू Strait of Hormuz से जुड़ा है। इस समुद्री गलियारे से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता रहा है। लेकिन, हालिया तनाव के चलते यहां हालात बिगड़ गए हैं। जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
