Heatwave in Europe: इस बार यूरोप में क्यों पड़ रही भीषण गर्मी, क्या 48 डिग्री तापमान का रिकॉर्ड टूटेगा

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Aug 1, 2023, 02:45 PM IST

शोध से संकेत मिलता है कि अत्यधिक गर्मी ने पहले ही यूरोप में आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे पिछले दशक में इसमें 0.5% तक की कमी आई है।

European Heatwave: यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ गर्मी से जूझ रहा है। हर तरफ गर्मी कहर बरपा रही है और लोग इससे बचने की पुरजोर कोशिश करते दिख रहे हैं। छतरी लिए और पानी की बौछारों वाले नजारे आम हैं। इटली का हाल बेहद बुरा है। यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की आशंका है। 2021 में सिसिली में 48.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था जो यूरोप का सर्वाधिक तापमान का रिकॉर्ड है। आशंका है कि इस बार की गर्मी ये रिकॉर्ड तोड़ सकती है। चिलचिलाती गर्मी फ्रांस, स्पेन, पोलैंड और ग्रीस सहित अन्य दक्षिणी और पूर्वी यूरोपीय देशों में भी फैल गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में लोकप्रिय छुट्टी मनाने की जगह जाने वाले लोगों ने अपना प्लान बदल लिया है।

सेर्बेरस नाम का एंटीसाइक्लोन जिम्मेदार

दरअसल, हीटवेव के लिए सेर्बेरस (Cerberus) नाम का एंटीसाइक्लोन जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ये एक उच्च दबाव प्रणाली है जो कम बादल बनाती है और कम हवा के साथ शुष्क मौसम लाती है। सहारा जैसे गर्म क्षेत्रों में बनने पर ये प्रणालियां कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहती हैं, जिससे गर्म तापमान पैदा होता है। द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के अनुसार, इटालियन मौसम विज्ञान सोसायटी का अनुमान है कि सेर्बेरस हीटवेव लगभग दो सप्ताह तक बनी रहेगी। जलवायु परिवर्तन ऐसी चरम मौसमी घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लगातार तापमान बढ़ने से वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न बदल रहा है, जिससे यूरोप में अत्यधिक तापमान और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं।

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