H-1B Visa Row: अमेरिका ने इंफोसिस, टाटा, विप्रो जैसी कई बड़ी आईटी कंपनियों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इन आईटी कंपनियों पर ग्रीन कार्ड प्रोग्राम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
'बड़े पैमाने पर हो रहा दुरुपयोग'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वीजा धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एच-1बी वीजा प्रोग्राम पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रोग्राम अमेरिका में उन नौकरियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए बनाया गया था, जिन्हें अमेरिकी कामगारों से नहीं भरा जा सकता, लेकिन अब इसमें बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।
यह ऐलान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने अमेरिकी एंटी फ्राड टास्क फोर्स के तहत की गई कार्रवाई के दौरान की।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने बताया कि डिपार्टमेंट ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड किया है। उन्होंने कहा कि संघीय स्तर पर चल रही जांचों के चलते माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रोग्राम से निलंबित किया गया है।
'माइक्रोसॉफ्ट अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला'
जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि कंपनी ने इस व्यवस्था का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जबकि कंपनी ने यह दावा किया उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके।
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श्रम मंत्री सोंडरलिंग ने कहा कि डिपार्टमेंट इन कंपनियों से जुड़े किसी भी नए या पेंडिंग परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन एप्लीकेशन को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ''2009 से इन कंपनियों ने 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। इस दौरान उन्हें 2.30 लाख से ज्यादा एच-1बी वीजा मंजूरियां और 1 लाख से अधिक परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन मिले हैं।
