US Secretary Marco Rubio : अमेरिका ने पाकिस्तान को राहत देने वाला बयान दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो साल 2021 में अफगानिस्तान में छोड़े गए अमेरिकी हथियार सहित सैन्य उपकरणों को वापस लेने के मुद्दे का हल निकालने के लिए तैयार हो गए हैं। अफगानिस्तान में करीब दो दशक तालिबान के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाला अमेरिका साल 2021 में अचानक से इस देश से निकल गया। हालांकि, उसने पीछे अपने भारी संख्या में हथियार अफगानिस्तान में छोड़ दिया। बताया जाता है कि तालिबान इन हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ करता है।
साल 2021 में अफगानिस्तान से निकल गया अमेरिका।-फाइल फोटो
इशाक डार से फोन पर हुई बातचीत
बयान के मुताबिक डिप्टी पीएम एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान रूबियो ने इसकी घोषणा की। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर चर्चा की। डार ने कहा कि उनका देश कारोबार, निवेश और आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के साथ अपना सहयोग बढ़ाएगा। यही नहीं दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान के ताजा हालात के बारे में भी चर्चा की। बयान के मुताबिक रूबियो ने कहा कि अफगानिस्तान में छोड़े गए अमेरिकी सैन्य उपकरण एवं हथियार के मुद्दे का हल निकालने की जरूरत है।
तालिबान, TTP करते हैं इन हथियारों का इस्तेमाल?
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के कुछ समय बाद अपने पड़ोसी देश के साथ पाकिस्तान के संबंध धीरे-धीरे पटरी से उतरने लगे। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान उस पर हमले करता है और तालिबान इस आतंकवादी संगठन का समर्थन करता है। पाकिस्तान को आशंका है कि अफगानिस्तान में छोड़े गए हथियारों का इस्तेमाल तालिबान और टीटीपी दोनों करते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका ने अरबों डॉलर मूल्य के हथियार अफगानिस्तान में छोड़े हैं।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 9 आतंकी मारे
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान के दौरान नौ आतंकवादी मारे गए। सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के एक बयान में कहा गया कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समूह के आतंकवादियों को डेरा इस्माइल खान जिले के तकवारा इलाके में सुरक्षाकर्मियों द्वारा रविवार रात अभियान के दौरान मार गिराया गया। बयान में कहा गया कि समूह का नेता शिरीन “कई आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता” और “निर्दोष नागरिकों की हत्या” के मामलों में वांछित था। इसमें कहा गया कि शिरीन 20 मार्च को कैप्टन हसनैन अख्तर की मौत के लिए भी जिम्मेदार था। बयान में कहा गया कि सुरक्षाबलों ने उनके पास से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया।
