US Iran War: इस्लामाबाद में हुई ईरान-यूएस शांति वार्ता के नाकाम होने के साथ ही एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सीमित सैन्य हमले फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। 15 दिन का युद्धविराम लागू होने के बाद से इन दिनों शांति बनी हुई है और ईरान-अमेरिका ने अपने हमले रोक दिए हैं। हालांकि, लेबनान पर इजराइल के हमले जारी हैं।
ईरान पर फिर हमले शुरू कर सकता है अमेरिका
इसी बीच अमेरिका ने ऐलान किया है कि वह समुद्री घेराबंदी करेगा और होर्मुज से किसी भी ऐसे जहाज को गुजरने नहीं देगा जिसने ईरान को टोल अदा किया हो। इसी के साथ ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की समुद्री घेराबंदी (Blockade) के ऐलान के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब थे, लेकिन अमेरिका के अड़ियल रवैये ने सब बिगाड़ दिया।
समझौते के 'करीब' होकर दूर हुए दोनों देश
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्ष समझौते से महज कुछ 'इंच' की दूरी पर थे। अराघची के अनुसार, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नियत के साथ अमेरिका से बातचीत की थी, लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं और 'अधिकतमवाद' (Maximalism) का रास्ता अपनाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अच्छाई के बदले अच्छाई मिलती है और दुश्मनी के बदले दुश्मनी।"
इस्लामाबाद में बातचीत विफल होने के तुरंत बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि 13 अप्रैल की रात (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी शुरू कर दी जाएगी। इस घेराबंदी के तहत ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों (अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी) में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों को रोका जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि इस घेराबंदी में अन्य देश भी अमेरिका का साथ देंगे।
21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद वार्ता नाकाम
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दो-तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे विचारों में मतभेद के कारण विफल रही। ईरान के साथ युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद यह समाप्त हो गई। अमेरिका और ईरान ने बातचीत के लिए 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई थी। एक तरह से इसके साथ ही पाकिस्तान के मंसूबों पर भी पानी फिर गया है। पाकिस्तान की कोशिश थी की युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करवाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटी जाए, लेकिन उसकी रणनीति सिरे न चढ़ सकीं।
अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगों' के कारण वार्ता नाकाम : ईरान
ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को कहा कि अमेरिका की ओर से अत्यधिक मांगों के कारण ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता रविवार को किसी समझौते के बिना समाप्त हो गई। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने हालांकि जोर देते हुए कहा कि कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि वार्ता शांति समझौते तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने इसका एक प्रमुख कारण यह बताया कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
वेंस ने कहा, ईरान ने प्रस्ताव नहीं माना
वेंस ने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव ईरान को दिया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, बकाई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, लेकिन दो-तीन महत्वपूर्ण मामलों पर मतभेद बने रहे। सरकारी प्रेस टीवी ने बकाई के हवाले से कहा, अंततः वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह पाकिस्तान की मध्यस्थता में शुरू हुई गहन वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेश और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। बकाई ने पहले एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पिछले 24 घंटों में वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों को हटाना और ईरान तथा क्षेत्र के खिलाफ युद्ध का पूर्ण अंत शामिल था।
