अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के लिए मतदान पूरे हो चुके हैं। अब मतों की गिनती की जा रही है। इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने अमेरिकी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती है। मंगलवार को लाखों अमेरिकियों ने मतदान किया। इस चुनाव के नतीजों से यह तय होगा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहेगा या डेमोक्रेट्स निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) पर कब्जा जमा लेंगे, जबकि सीनेट के लिए दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई है।
अमेरिका में मतदान अंतिम दौर में
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, मतदाता नाराज
अमेरिकी इतिहास और राजनीतिक ट्रेंड्स के मुताबिक, मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से लगभग हर मिडटर्म चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग अपने सबसे निचले स्तर के करीब चल रही है। मतदाता ईरान के साथ युद्ध, बढ़े हुए ईंधन के दामों और महंगाई को लेकर खासे नाराज और चिंतित नजर आ रहे हैं।
प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों और एसोसिएटेड प्रेस की ओर से SSRS द्वारा कराए गए एग्जिट पोल के मुताबिक, करीब आधे मतदाताओं ने 2026 के मध्यावधि चुनाव को राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने का मौका बताया। वहीं, करीब तीन-चौथाई मतदाताओं ने देश की मौजूदा दिशा पर नाराजगी या असंतोष जताया। लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं का मानना है कि कांग्रेस को राष्ट्रपति की शक्तियों पर अधिक नियंत्रण रखना चाहिए।
मध्यावधि चुनाव को आमतौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जाता है। ट्रंप ने भी अपने समर्थकों से कहा था कि वे ऐसा समझकर मतदान करें जैसे वह खुद चुनाव मैदान में हों। डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी इसी बात को अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाया।
कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत की लड़ाई
अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुआ। वहीं, ऊपरी सदन सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान कराया गया। डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम तीन सीटें रिपब्लिकन पार्टी से जीतनी होंगी। वहीं, सीनेट में बहुमत के लिए उन्हें चार सीटों का फायदा हासिल करना होगा।
रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा की 47 सीटों पर कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। यदि बाकी सीटों पर अनुमान के मुताबिक नतीजे आते हैं, तो डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए इन 47 में से केवल 13 सीटें जीतनी होंगी। हालांकि, सीनेट में डेमोक्रेट्स की राह ज्यादा मुश्किल है। उन्हें अपनी मौजूदा सभी सीटें बचाने के साथ उन राज्यों में भी जीत हासिल करनी होगी, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को दोहरे अंकों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें अलास्का, आयोवा, कंसास, नेब्रास्का, ओहायो, साउथ कैरोलिना और टेक्सास जैसे राज्य शामिल हैं।
चुनाव नतीजों को चुनौती देने की आशंका
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी अमेरिकी चुनावों में धांधली के आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में कानूनी विशेषज्ञों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने आशंका जताई है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हारती है तो ट्रंप नतीजों को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने चुनाव की निगरानी के लिए सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 चुनाव पर्यवेक्षकों और मॉनिटरों को तैनात किया है। विभाग ने इसे अमेरिकी इतिहास में चुनाव दिवस पर निगरानी का सबसे बड़ा अभियान बताया है। हालांकि, डेमोक्रेट्स ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे मतदाताओं को डराने की संभावित कोशिश बताया है।
