US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही अहम वार्ता को फिलहाल रोक दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि दोनों पक्षों ने अपने-अपने स्तर पर आंतरिक सलाह-मशविरा के लिए अगला कदम तय करने का फैसला किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही अहम वार्ता पर विराम लगा। AI IMAGE
वहीं, ईरान की अमेरिकी वार्ता टीम के एक सदस्य ने दावा किया है कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने से जुड़ा मसौदा तैयार हो चुका है और इसे जल्द लागू किया जा सकता है। ईरानी पक्ष के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद तेल निर्यात को फिर से गति देना और क्षेत्रीय तनाव के बीच आर्थिक गतिविधियों को बहाल करना है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस व्यवस्था के तहत ईरान को तय शर्तों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति मिल सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। अब दोनों पक्ष अपने-अपने नेतृत्व और संबंधित संस्थाओं के साथ चर्चा करने के बाद अगले दौर की वार्ता की तैयारी करेंगे। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने बातचीत को सकारात्मक बताया और प्रगति के संकेत दिए हैं, लेकिन क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा से जुड़े सवाल अब भी चुनौती बने हुए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित दुनिया के कई शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया, लेकिन इस शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने माहौल को और गर्मा दिया है।
वार्ता के बीच ट्रंप ने दी ईरान को धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ईरान को सीधी धमकी दी है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी (समर्थित गुटों) को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना चाहिए। ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि इस बार हमला उससे भी ज्यादा जोरदार होगा।"
क्या है ईरान की शर्तें?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई के मुताबिक, ईरान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान में जारी इजरायली हमले हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू करवाने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जो शांति समझौते की पहली शर्त थी। इसके अलावा ईरान चाहता है कि उस पर से तेल बेचने के प्रतिबंध हटाए जाएं और कतर के बैंक में फंसे उसके 6 अरब डॉलर ($6 Billion) के फंड को जल्द से जल्द रिलीज किया जाए।
