अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ने और उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह बेदखल करने के लिए अपने अभियान को और तेज कर दिया है। शुक्रवार को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तुर्की के प्रमुख वित्तीय संस्थान 'गोल्डन ग्लोबल यतिरीम बैंकसी' और उसकी दो सहायक कंपनियों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
अमेरिका का ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट
चीन से तेल का पैसा, तुर्की में कैश और गोल्ड में तब्दील
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इस्तांबुल स्थित 'गोल्डन ग्लोबल बैंक' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य चीन को बेचे जाने वाले ईरानी तेल के राजस्व को तुर्की ट्रांसफर करना था। बैंक के जरिए चीन से आने वाले फंड को तुर्की में कैश और सोने में बदला जाता था। बैंक ने जानते-बूझते हुए ईरानी वित्तीय संस्थाओं और 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से जुड़े खातों को कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराईं। ट्रेजरी विभाग ने इस बैंक का संबंध 2022 में प्रतिबंधित किए गए तुर्की कारोबारी सितकी अयान के नेटवर्क से भी जोड़ा है, जो तेहरान के तेल राजस्व को गुप्त तरीके से ट्रांसफर करने में शामिल था।
"हम जानते हैं आप कहां हैं, सांप का सिर कुचल देंगे": स्कॉट बेसेंट
हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे एक सप्ताह पहले अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मिस्र के एक बैंक के परिचालन को सीमित किया था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संदेश दिया कि ईरान के साथ वित्तीय संबंध रखने वाले बैंक और संस्थाएं यह समझ लें कि हम 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' को लेकर बेहद गंभीर हैं। हम जानते हैं कि आप कौन हैं और कहां छिपे हैं। जब तक हम ईरानी सांप का सिर नहीं कुचल देते, हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसी कार्रवाई जारी रखेंगे।
'इकोनॉमिक डी-डे' की योजना पर उठे सवाल
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को पूरी तरह से अलग-थलग करने का वाशिंगटन का "आर्थिक डी-डे" का इरादा अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। चीन और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर सीधे कड़े प्रतिबंध लगाने के बजाय अमेरिकी प्रशासन चेतावनी देने और वार्ताओं का सहारा लेता दिख रहा है।
ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में उथल-पुथल से बचने के लिए अमेरिका बड़े देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने में सतर्कता बरत रहा है। इसके अलावा, अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक रूप से भी सिरदर्द बनी हुई हैं।
