Iran News: अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्ते तक चले संघर्ष में अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि उसने तेहरान की पारंपरिक नौसेना के ज्यादातर हिस्से को तबाह कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर दिन दावा करते हैं कि उन्होंने ईरान की नौसेना का खत्म कर दिया है। इसके बावजूद, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना काफी नियंत्रण बनाए हुए है। यह कैसे संभव है? जानते हैं कि ईरानी नौसेनाओं की मौजूदा स्थिति के पीछे की कहानी
US ने ईरानी नौसेना को 'तबाह' कर दिया, तो फिर भी होर्मुज पर तेहरान का नियंत्रित कैसे? ईरान की डबल नौसेनाओं में फंस रहे ट्रंप
ईरान के पास 'दो नौसेनाएं'
नियमित नौसेना, The Regular Navy (Artesh)
इसे 'प्रतिष्ठा' बेड़ा कहा जाता है; इसके बड़े सतही जहाज और फ्रिगेट अमेरिकी हमलों के मुख्य निशाने थे। US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि 6 अप्रैल तक उसने 155 से ज्यादा ईरानी जहाज डुबो दिए हैं, जिनमें अत्याधुनिक स्टील्थ कैटामरन IRIS शाहिद सय्यद शिराजी और फ्रिगेट IRIS डेना शामिल हैं।
जानकारों का अनुमान है कि ईरान अपनी इस पारंपरिक नौसैनिक क्षमता का 80% से 90% हिस्सा खो चुका है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना (IRGC)
यह अर्धसैनिक बेड़ा एक असममित रणनीति पर निर्भर करता है, जिसमें छोटे, फुर्तीले तेज-हमला करने वाले जहाज, पानी में चलने वाले ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।
इस बेड़े का 60% से अधिक हिस्सा अभी भी सुरक्षित और काम करने की हालत में है। वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, इन छोटे जहाजों को निशाना बनाना अधिक कठिन होता है और इन्हें विशेष रूप से जलडमरूमध्य के संकरे और भीड़भाड़ वाले जलक्षेत्र के लिए ही डिजाइन किया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा स्थिति क्या है?
8 अप्रैल को युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद, यह जलडमरूमध्य असल में बंद ही है। IRGC ने हर देश के लिए अलग अनुमति प्रणाली लागू कर दी है, जिसके तहत जहाजों को उनके जरिए ही तालमेल बिठाना पड़ता है और कुछ मामलों में, हर जहाज से $1 मिलियन से ज्यादा का टोल भी वसूला जा रहा है।
11 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने युद्ध शुरू होने के बाद से अपना पहला 'नेविगेशन की आजादी' (Freedom of Navigation - FON) वाला अभियान शुरू किया। इसके तहत नौसैनिक बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी जैसे विध्वंसक जहाजों को तैनात किया गया। FON के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून कहता है कि किसी भी जहाजों को समुद्र में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता है।
इस रुकावट की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़कर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इस जलमार्ग से होने वाला जहाजों का आवागमन फिलहाल सामान्य स्तर के 10% से भी कम रह गया है।
ईरान लगातार चेतावनी जारी कर रहा है कि जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले किसी भी अमेरिकी जहाज पर 30 मिनट के भीतर हमला किया जाएगा। 11 अप्रैल को तो लगभग टकराव की स्थिति बन ही गई थी। लेकिन अमेरिकी विध्वंसक जहाज (destroyer) वापस लौट गया, जिसके बाद अंततः दो अन्य जहाजों ने वहां से गुजारा किया।
IRGC की अपनी अलग नौसेना की कमांड
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करने की घोषणा की
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। ’यूएस सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि यह नाकेबंदी ’सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी' जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। बता दें कि युद्धविराम के बाद भी जलडमरूमध्य में यातायात सीमित रहा है। जानकारों के अनुसार युद्धविराम शुरू होने के बाद से 40 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया है।
तेहरान नौसेना ने होर्मुज पर नियंत्रण का दावा किया
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूर्ण नियंत्रण है, और चेतावनी दी कि इस जलमार्ग के करीब आने वाले किसी भी सैन्य जहाज को कड़ा और जोरदार जवाब दिया जाएगा। तेहरान ने यह भी कहा कि यह जलडमरूमध्य गैर-सैन्य जहाजों के लिए खुला रहेगा।
अमेरिका ने असल में क्या डुबोया?
उसने ज्यादातर ईरान की नियमित नौसेना (बड़े युद्धपोत) को नष्ट किया, न कि उसकी सभी सेनाओं को।
कौन सी नौसेना अभी भी सक्रिय है?
IRGC नौसेना, जो असममित हमलों के लिए छोटी नावों, ड्रोन और माइंस का इस्तेमाल करती है।
ईरान अभी भी होर्मुज को कैसे नियंत्रित कर सकता है?
संकीर्ण जलडमरूमध्य में जहाजों को धमकाकर और उन्हें बाधित करके, भले ही उसके पास बड़े युद्धपोत न हों।
