पश्चिम एशिया की जंग से USS Gerald R. Ford के एग्जिट के बाद अब अमेरिका ने अपना एक दूसरा युद्धपोत USS Tripoli को तैनात कर दिया है। USS Tripoli अपने साथ युद्धक विमान और युद्धपोत तो लाया ही है, साथ ही 3500 अमेरिकी मरीन भी पहुंची है। जिसके बाद यह आशंका जताई जा रही है कि क्या अमेरिका, ईरान के अंदर जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है?
ईरान जंग में USS Tripoli की एंट्री (फोटो- @CENTCOM)
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जापान से आया है USS Tripoli
ईरान के साथ जंग में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करते हुए अपने सबसे बड़े उभयचर हमलावर जहाजों (Amphibious Assault Ship) में से एक USS Tripoli को तैनात कर दिया है। करीब 3,500 अमेरिकी मरीन सैनिकों के साथ यह जहाज अब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में सक्रिय युद्ध संचालन के लिए पहुंच चुका है। यह तैनाती जापान स्थित अपने होम बेस से की गई है, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका क्षेत्र में तेजी से सैन्य तैयारियां बढ़ा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि USS Tripoli पर सवार अमेरिकी नौसैनिक और मरीन 27 मार्च को CENTCOM के क्षेत्र में पहुंच गए।
कितना खतरनाक है USS Tripoli?
USS Tripoli अमेरिका के America-class उभयचर हमलावर जहाजों में शामिल है और यह Tripoli Amphibious Ready Group तथा 31st Marine Expeditionary Unit का प्रमुख जहाज (फ्लैगशिप) है। आकार में यह लगभग एक एयरक्राफ्ट कैरियर जितना बड़ा है और इसमें दर्जनों हेलीकॉप्टर, MV-22 Osprey विमान और अत्याधुनिक F-35B जॉइंट स्ट्राइक फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं। इस जहाज की खासियत यह है कि यह केवल सैनिकों को ले जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमला करने और त्वरित सैन्य अभियान चलाने की पूरी क्षमता मौजूद है। इसके साथ ही इसमें उभयचर (समुद्र से जमीन पर उतरने वाले) और सामरिक (टैक्टिकल) हथियार भी शामिल हैं, जो किसी भी युद्ध क्षेत्र में तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं।
परमाणु विमानवाहक पोतों के साथ जुड़ा नया जहाज
USS Tripoli की तैनाती के साथ अब यह जहाज उन अमेरिकी परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोतों के बेड़े में शामिल हो गया है, जो पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इनमें Nimitz और Ford-class के एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं। इससे पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य शक्ति और भी ज्यादा मजबूत हो गई है।
USS Gerald R. Ford जंग से बाहर
इस बीच, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford, जिसे पहले ईरान के खिलाफ पश्चिम एशिया में अमेरिका के अभियान को समर्थन देने के लिए तैनात किया गया था, अब अमेरिकी नौसेना के अनुसार 29 मार्च तक पोर्ट ऑफ स्प्लिट पर लंगर डाले हुए है। इससे पहले आई रिपोर्टों में बताया गया था कि जहाज के लॉन्ड्री सेक्शन में आग लगने और लगातार प्लंबिंग संबंधी समस्याओं के कारण USS Gerald R. Ford को ईरान वाले युद्ध क्षेत्र (थिएटर) से हटाना पड़ा। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकी समस्याओं के चलते यह जहाज संभावित रूप से एक साल तक सेवा से बाहर रह सकता है। वहीं ईरान का दावा है कि उसके हमले के कारण USS Gerald R. Ford पर नुकसान हुआ है।
