Annalena Baerbock India Visit: संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक (Annalena Baerbock) ने वैश्विक हालात को लेकर चिंता जताई है और देशों से संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के प्रति दोबारा मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव और अलगाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) के साथ बातचीत के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल पर भी सवाल उठाए। यह एक नया ढांचा बताया गया है, जिसमें शांति प्रयासों के लिए देशों से बड़ी रकम ली जाती है। इस पर टिप्पणी करते हुए बेयरबॉक (Jaishankar meeting with Annalena Baerbock) ने कहा कि शांति किसी शुल्क के आधार पर नहीं मिल सकती।
UNGA अध्यक्ष बेयरबॉक का बड़ा बयान, UN सुधार पर जोर
दुनिया आज कई बड़ी चुनौतियों का कर रही सामना-बेयरबॉक
उन्होंने जोर देकर कहा कि यूनाइटेड नेशन (United Nations) की खासियत यही है कि इसमें हर देश चाहे छोटा हो या बड़ा अपनी बात रख सकता है। अगर किसी मंच पर शामिल होने के लिए पैसा देना पड़े, तो वह सभी के लिए न्यायसंगत नहीं हो सकता। बेयरबॉक ने यह भी कहा कि आज दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारी, युद्ध और आर्थिक संकट। ऐसे मुद्दों को कोई एक देश अकेले हल नहीं कर सकता। इसके लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून इस समय दबाव में हैं।
शांति और सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार संयुक्त राष्ट्र के तीन मुख्य स्तंभ
उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के तीन मुख्य स्तंभ : शांति और सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार। इन सभी पर असर पड़ रहा है। बैठक के दौरान भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। बेयरबॉक ने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया और कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में भारत की भूमिका अहम है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के योगदान की भी सराहना की, खासकर शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी कहा कि आज की दुनिया के हिसाब से संयुक्त राष्ट्र में सुधार जरूरी है, ताकि विकासशील देशों की आवाज को ज्यादा महत्व मिल सके।
इस दिशा में 'रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म' की जरूरत बताई गई। बेयरबॉक ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन को ज्यादा प्रभावी, तेज और आधुनिक बनना होगा ताकि वह 21वीं सदी की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सके। कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो इस बैठक ने यह साफ कर दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग और मजबूत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
