पश्चिमी सहारा पर UNSC में अमेरिका और रूस आमने-सामने, दोनों के प्रस्ताव खारिज, संकट में शांति मिशन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पश्चिमी सहारा विवाद पर अमेरिका और रूस के प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव गिर गए हैं। रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव पर वीटो लगाया, जबकि रूस का प्रस्ताव पर्याप्त वोट न मिलने से खारिज हो गया।

खनिज संपदा से समृद्ध विवादित पश्चिमी सहारा क्षेत्र को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में दो महाशक्तियों, अमेरिका और रूस के बीच तीखा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला है। शुक्रवार को हुई एक नाटकीय वोटिंग के दौरान सुरक्षा परिषद में पेश किए गए अमेरिका और रूस दोनों के ही प्रस्ताव गिर गए। रूस ने अमेरिका द्वारा तैयार किए गए उस प्रस्ताव पर अपना वीटो इस्तेमाल कर दिया, जो पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता के दावे का समर्थन करता था और संयुक्त राष्ट्र के 35 साल पुराने शांति रक्षा मिशन को समाप्त करने का प्रस्ताव रखता था। इसके तुरंत बाद, 1 साल के लिए शांति मिशन का कार्यकाल बढ़ाने वाले रूस के प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव को भी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आवश्यक 9 वोट न मिलने के कारण खारिज कर दिया गया। इस कूटनीतिक गतिरोध के बाद यूएन शांति मिशन का जनादेश समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और युद्ध का खतरा गहरा गया है।

The United States delegation in UN

UN में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज

अमेरिका का प्रस्ताव: मोरक्को की संप्रभुता को मान्यता देने का प्लान

अमेरिका द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता के तहत स्वायत्तता देने की योजना को ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान बताया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में मांग की गई थी कि 30 अप्रैल 2027 तक संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन (MINURSO) को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और उसकी जगह एक नया राजनीतिक मिशन स्थापित किया जाए, जो जनमत संग्रह की तैयारियों को रोक दे। रूस और चीन लंबे समय से पश्चिमी सहारा के स्वदेशी सहरावी लोगों के लिए जनमत संग्रह का समर्थन करते रहे हैं, जिसमें स्वतंत्रता का विकल्प भी शामिल हो। नतीजतन, रूस ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर अमेरिकी मसौदे को निरस्त कर दिया।

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