Turkey Syria Earthquake Update: तुर्की और सीरिया में भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। इन दोनों देशों में मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हजार के पार चली गई है। दुनिया भर की राहत एवं बचाव कार्य की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने एवं मानवीय मदद में जुटी हैं। लेकिन समय जैसे-जैसे बीत रह है वैसे-वैसे मलबे में दबे लोगों के जिंदा बचने की उम्मीद कम होती जा रही है।
भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान तुर्की को उठाना पड़ा है। जान-माल के नुकसान का स्तर इतना बड़ा है कि राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने इसे 'शताब्दी की सबसे बड़ी तबाही' बताया है। गौर हो कि तुर्की में आशियाने ताश के पत्तों की तरह ढह गए, शहर कब्रिस्तान बन गए। जब तक धरती का गुस्सा शांत हुआ तो पीछे बस मौत, मातम और मलबा ही बचा था।
रिपोर्टों में कहा गया है कि केवल तुर्की में साढ़े छह हजार से ज्यादा इमारतें ध्वस्त हो गई हैं, भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की में दुनिया की सबसे पहली मदद भेजी, भारतीय मदद की तारीफ तुर्की ने की है वहीं भूकंप ने बता दिया है कि अगर प्रकृति से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो कहीं भी तबाही मच सकती है।
कमजोर नहीं पड़ा है रेस्क्यू टीमों का हौसला
रेस्क्यू टीमों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। राहत एवं बचाव कार्य में जुटी टीमों को मलबों से लोगों को जिंदा एवं सुरक्षित निकालने में कामयाबी भी मिल रही है। कई जगहों पर बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग मौत को मात देकर उठ खड़े हुए हैं।
विनाशलीला का दर्द पीड़ितों की आंखों में झलक रहा है
भूकंप की विनाशलीला का दर्द पीड़ितों की आंखों में झलक रहा है। अपनों के खोने और बेघर हो जाने की पीड़ा से लोग कराह रहे हैं। कुदरत के इस कहर का सामना लोगों को ऐसे समय करना पड़ा है जब दोनों देशों में भीषण ठंड पड़ रही है। बेघर हुए लोगों के पास रहने के लिए कोई उचित ठिकाना नहीं है। कंबल में लिपटे हुए लोगों को आग जलाकर सर्दी भगाते देखा गया है। तुर्की के मारस में लोग एक बैंक में शरण लिए हैं। अपनी निजता बनाए रखने के लिए खिड़की पर शीट लगाई है। कुछ लोगों ने सड़क किनारे खुले मैदान में मेक शिफ्ट टेंट लगाया है।
