Iran US talks Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump news) ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने दुनिया के कई संघर्षों को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ट्रंप ने यह बातें टर्निंग पॉइंट यूएसए कार्यक्रम (Turning Point USA event) में कही, जहां उन्होंने खुद को शांति स्थापित करने वाला बताया। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कुल आठ युद्धों को समाप्त कराया है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान (India Pakistan conflict Trump) के बीच तनाव का भी जिक्र किया और दावा किया कि उनकी कोशिशों से एक बड़ा युद्ध टल गया, जिससे लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की जान जा सकती थी।
होर्मुज से हटेगा तनाव? ट्रंप बोले- समझौते के बाद खत्म होगा दबाव (Photo: ANI)
संख्या पहुंच सकती है 10 - ट्रंप
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान और लेबनान से जुड़े हालात को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या दस युद्धों तक पहुंचती है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब पूरी तरह खुला है और वहां से व्यापार सामान्य रूप से हो सकता है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अमेरिका की नौसेना की मौजूदगी अभी जारी रहेगी। यह तब तक बनी रहेगी, जब तक ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता पूरी तरह से साइन नहीं हो जाता।
अमेरिका और ईरान के बीच अगली बैठक इस्लामाबाद में होने की संभावना
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान और इजराइल के बीच संघर्ष को लेकर भी ट्रंप ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की मदद से दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक युद्धविराम हुआ है, जिसे पहले संभव नहीं माना जा रहा था। ट्रंप के अनुसार, यह कदम क्षेत्र में शांति लाने की दिशा में बहुत अहम है। ईरान के साथ चल रही बातचीत पर भी उन्होंने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और प्रगति हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि समझौता पूरी तरह होने के बाद ही अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव करेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच अगली बैठक इस्लामाबाद में होने की संभावना है, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक से भविष्य में किसी बड़े समझौते की उम्मीद की जा रही है। कुल मिलाकर अगर कहें तो ट्रंप ने अपने भाषण में यह दिखाने की कोशिश की कि उनकी नीतियों से वैश्विक स्तर पर शांति कायम करने में मदद मिली है। हालांकि, उनके इन दावों पर अलग-अलग देशों और विशेषज्ञों की राय अलग हो सकती है।
