इजरायल की आलोचना करने वाले विदेशी छात्रों को नहीं कर सकते डिपोर्ट, ट्रंप की डिपोर्टेशन पॉलिसी पर अमेरिकी अदालत ने लगाई रोक

अमेरिका की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर रोक लगाई है, जिसके तहत इजरायल की आलोचना या फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन करने वाले विदेशी छात्रों के वीजा रद्द कर उन्हें निर्वासित किया जा सकता था। सैन जोस के संघीय जज नोएल वाइज ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों से टकराने वाला बताया। कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के अधिकारों और राजनीतिक अभिव्यक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई और तेज हो सकती है।

Israel Protests Deportation Policy: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर आपत्ति जाहिर की है, जिसके तहत इजरायल की आलोचना करने या फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले विदेशी छात्रों के वीजा रद्द कर उन्हें देश से निर्वासित किया जा सकता था। कैलिफोर्निया के सैन जोस में संघीय जज नोएल वाइज ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार की ऐसी कार्रवाई संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

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'फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन पर डिपोर्टेशन करना गैरकानूनी', ट्रंप की नीति पर अमेरिकी अदालत ने उठाए सवाल। AP

जज वाइज ने कहा कि अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ सरकार या उसके नेताओं के समर्थन में विचार व्यक्त करने तक सीमित नहीं हो सकती। अदालत ने माना कि सरकार की ओर से विदेशी छात्रों को उनके राजनीतिक विचारों के कारण निशाना बनाने की कार्रवाई संविधान के प्रथम और पांचवें संशोधन से टकराती है।

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